जम्मू। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जहां शहरभर में श्रद्धालु उत्साह और भक्ति के साथ त्योहार मना रहे थे, वहीं पतंगबाजी के दौरान प्रतिबंधित गट्टू डोर का इस्तेमाल कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया। शहर के अलग-अलग इलाकों में गट्टू डोर की चपेट में आने से करीब दस लोगों के घायल होने के मामले सामने आए हैं। घायलों में दोपहिया वाहन चालक के साथ एक बच्चा भी शामिल है। कुछ घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

गट्टू डोर से जुड़ी घटनाओं ने प्रतिबंध के बावजूद इसके इस्तेमाल और बिक्री पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह डोर सामान्य धागे की तुलना में बेहद मजबूत और धारदार हो सकती है। सड़क पर वाहन चलाते लोगों के गले, चेहरे या हाथ में फंसने पर गंभीर चोट का खतरा रहता है।

मट्टू फ्लाईओवर पर सामने आए मामले

जानकारी के मुताबिक गट्टू डोर से घायल होने की कुछ घटनाएं जम्मू के मट्टू फ्लाईओवर के आसपास सामने आईं। यहां एक दोपहिया वाहन चालक अचानक हवा में लटक रही डोर की चपेट में आ गया।

डोर लगने से वाहन चालक घायल हो गया। घटना के बाद उसे उपचार के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) जम्मू की आपातकालीन इकाई में ले जाया गया।

अस्पताल में उसे वार्ड नंबर चार में भर्ती कर उपचार दिया गया। अचानक डोर की चपेट में आने से वाहन चालक के लिए स्थिति खतरनाक हो सकती थी, क्योंकि चोट लगने के साथ वाहन से संतुलन बिगड़ने का खतरा भी रहता है।

बच्चे के हाथ में गंभीर चोट

एक अन्य मामले में गट्टू डोर की चपेट में आने से एक बच्चे के हाथ में गंभीर चोट आई। बच्चे को उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा।

पतंग उड़ाने या सड़क पर पड़ी डोर के संपर्क में आने से बच्चों के घायल होने का खतरा अधिक रहता है। धारदार डोर हाथ और उंगलियों पर गहरे घाव कर सकती है।

जन्माष्टमी के दौरान पतंगबाजी बढ़ने के कारण शहर के विभिन्न क्षेत्रों में ऐसी डोर सड़कों, बिजली के तारों, पेड़ों और अन्य स्थानों पर फंसी दिखाई दे सकती है।

करीब दस लोगों के घायल होने की सूचना

पर्व के दौरान शहर में करीब दस लोगों के गट्टू डोर की चपेट में आने से घायल होने की बात सामने आई है।

इनमें दोपहिया वाहन चालक और बच्चे के अलावा अन्य लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं। अलग-अलग इलाकों में हुई घटनाओं ने एक बार फिर प्रतिबंधित डोर के इस्तेमाल से पैदा होने वाले खतरे को उजागर किया है।

विशेष रूप से सड़क पर चलने वाले बाइक और स्कूटर सवारों के लिए हवा में लटकती डोर गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।

प्रतिबंध के बावजूद इस्तेमाल पर सवाल

गट्टू डोर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध होने के बावजूद त्योहार के दौरान इसके उपयोग की घटनाएं सामने आना चिंता का विषय है।

ऐसी डोर के इस्तेमाल को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन इसके बावजूद यदि यह लोगों तक पहुंच रही है तो इसकी बिक्री और आपूर्ति पर प्रभावी रोक को लेकर सवाल उठते हैं।

प्रतिबंध का उद्देश्य लोगों के साथ पशु-पक्षियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

दोपहिया वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा

गट्टू डोर का सबसे अधिक खतरा सड़क पर चलने वाले दोपहिया वाहन चालकों के लिए माना जाता है। कई बार पतंग कटने के बाद डोर सड़क के एक किनारे से दूसरे किनारे तक हवा में लटकी रह जाती है।

तेज गति से आ रहे बाइक सवार को पतली डोर दूर से दिखाई नहीं देती। ऐसे में डोर अचानक गर्दन या चेहरे से टकरा सकती है।

इससे गंभीर कट लगने के साथ चालक का संतुलन बिगड़ सकता है और सड़क दुर्घटना भी हो सकती है।

पक्षियों के लिए भी जानलेवा

गट्टू डोर केवल इंसानों के लिए ही नहीं बल्कि पक्षियों के लिए भी खतरनाक होती है। पेड़ों और बिजली के तारों में फंसी डोर में पक्षी उलझ सकते हैं।

डोर में फंसने से उनके पंख और शरीर घायल हो सकते हैं। कई बार वे खुद को छुड़ाने की कोशिश में और गंभीर रूप से जख्मी हो जाते हैं।

इसी वजह से पर्यावरण और पशु-पक्षी संरक्षण से जुड़े लोग भी ऐसी डोर के इस्तेमाल से बचने की अपील करते हैं।

त्योहार की खुशी के बीच बढ़ी परेशानी

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जम्मू में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पतंगबाजी भी देखने को मिली। लोग परिवार और दोस्तों के साथ त्योहार का आनंद ले रहे थे।

इसी दौरान प्रतिबंधित गट्टू डोर से लोगों के घायल होने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी। करीब दस लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आने के बाद इसके इस्तेमाल को लेकर सतर्कता की जरूरत महसूस की जा रही है।

बिक्री और इस्तेमाल रोकने की जरूरत

प्रतिबंधित डोर से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल उपयोग करने वालों पर ही नहीं बल्कि इसकी अवैध बिक्री और आपूर्ति पर भी नजर रखना जरूरी है।

दुकानों और ऑनलाइन माध्यमों से ऐसी सामग्री की उपलब्धता पर प्रभावी निगरानी दुर्घटनाओं को रोकने में मदद कर सकती है।

इसके साथ लोगों को सुरक्षित पतंगबाजी के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है। सामान्य और पर्यावरण के अनुकूल धागे का इस्तेमाल कर इस तरह के हादसों का जोखिम कम किया जा सकता है।

सावधानी से टल सकते हैं हादसे

त्योहारों के दौरान पतंगबाजी करते समय लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनकी गतिविधि से सड़क पर चलने वाले लोगों या आसपास मौजूद बच्चों को नुकसान न पहुंचे।

पतंग उड़ाने के लिए खुली और सुरक्षित जगह चुनना तथा प्रतिबंधित धारदार डोर का इस्तेमाल नहीं करना जरूरी है।

फिलहाल जन्माष्टमी के दौरान करीब दस लोगों के घायल होने की घटनाओं ने एक बार फिर गट्टू डोर के खतरे को सामने ला दिया है। मट्टू फ्लाईओवर पर दोपहिया वाहन चालक के घायल होने और बच्चे के हाथ में गंभीर चोट लगने के बाद प्रतिबंधित डोर के इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त निगरानी की जरूरत सामने आई है।

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