Jammu में उपमुख्यमंत्री ने गैर-मुमकिन खादों के मुद्दे पर बैठक की अध्यक्षता

Update: 2026-04-28 13:40 GMT
Jammu.जम्मू: जम्मू में हाल ही में उपमुख्यमंत्री ने गैर-मुमकिन खादों के मुद्दे पर उप-समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में इन खादों के उपयोग, वितरण और नियंत्रण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार करना था।
बैठक में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और राज्य के संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। उन्होंने गैर-मुमकिन खादों की उपलब्धता, गुणवत्ता, प्रभाव और किसानों तक उनकी पहुंच के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कृषि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने के लिए खादों की गुणवत्ता और उचित उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों को सुरक्षित, प्रभावी और प्रमाणित खादों की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि गैर-मुमकिन खादों के गलत या अनुचित उपयोग से फसलों और मिट्टी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उपमुख्यमंत्री ने इस दिशा में उपयुक्त नीतियाँ और नियंत्रण उपाय अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसानों को शिक्षित करना और उन्हें सटीक जानकारी देना आवश्यक है ताकि वे केवल प्रमाणित खादों का ही उपयोग करें।
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि राज्य में कुछ गैर-मुमकिन खादों का अवैध उपयोग देखा गया है, और इसे रोकने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को सस्ता, सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस प्रकार की बैठकें कृषि क्षेत्र में नीति निर्माण और सुधार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। यह न केवल खादों के सही उपयोग को सुनिश्चित करती हैं बल्कि किसानों और कृषि उत्पादन पर सकारात्मक असर डालती हैं।
उपमुख्यमंत्री ने बैठक के अंत में जोर दिया कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और कृषि उत्पादकता में सुधार करना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए न केवल उच्च गुणवत्ता वाले खादों की आपूर्ति जरूरी है, बल्कि उनके सही इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे।
बैठक में उठाए गए निर्णयों और दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्य में गैर-मुमकिन खादों की निगरानी, वितरण और नियंत्रण व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। किसानों को प्रमाणित और प्रभावी खाद उपलब्ध कराने के लिए उपयुक्त योजनाओं और सहायता कार्यक्रमों पर ध्यान दिया जाएगा।
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