Jammu.जम्मू: जम्मू-कश्मीर में बीडीएसए (BDSA) यूनिट ने हाल ही में डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन, उनके योगदान और समाज में समानता एवं न्याय के महत्व को उजागर करने के लिए एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया। यह कार्यक्रम स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों और समाज के विभिन्न वर्गों के लिए प्रेरक साबित हुआ।
सेमिनार का उद्देश्य छात्रों, शिक्षकों और नागरिकों के बीच सामाजिक जागरूकता बढ़ाना था। आयोजकों ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने केवल भारतीय संविधान की रचना में अहम भूमिका निभाई, बल्कि समाज में जातिवाद और असमानता के खिलाफ लड़ाई भी लड़ी। इस सेमिनार के माध्यम से युवाओं को उनके विचारों और सिद्धांतों से परिचित कराना मुख्य उद्देश्य था।
कार्यक्रम में बीडीएसए के सदस्य, शिक्षाविद और छात्र उपस्थित थे। सेमिनार के दौरान डॉ. अंबेडकर के जीवन के विभिन्न पहलुओं, उनके शिक्षण और समाज सुधारक दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा की गई। उपस्थित लोगों ने उनके संविधान निर्माण में किए गए योगदान को विशेष रूप से सराहा।
बीडीएसए के अध्यक्ष ने कहा, “डॉ. अंबेडकर का जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा और न्याय के माध्यम से ही समाज में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है। हम चाहते हैं कि हमारे युवा उनके आदर्शों को समझें और उन्हें अपने जीवन में अपनाएं।”
इस अवसर पर छात्रों ने सवाल-जवाब सत्र में सक्रिय भाग लिया और सामाजिक समानता, आर्थिक न्याय और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। शिक्षक और शिक्षाविदों ने भी डॉ. अंबेडकर के संघर्ष और उनके सिद्धांतों के महत्व पर प्रकाश डाला।
सेमिनार में समाज में न्याय और समानता बनाए रखने के लिए युवाओं की भूमिका पर जोर दिया गया। बीडीएसए के सदस्य ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने हमेशा यह माना कि शिक्षा और समाजिक जागरूकता से ही असमानताओं को दूर किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में बीडीएसए ने आगामी महीनों में और भी सेमिनार और कार्यशालाओं के आयोजन का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता फैलाने में मदद करते हैं।
इस सेमिनार के माध्यम से उपस्थित लोगों ने डॉ. अंबेडकर की जीवनगाथा और उनके सामाजिक दृष्टिकोण से प्रेरणा ली। उन्होंने शिक्षा, समानता और न्याय के महत्व को समझते हुए समाज में सुधार लाने का संकल्प लिया।