राजौरी-पुंछ में सेना का कमाल, घंटों में बहाल हुआ हाईवे

Update: 2026-07-21 13:24 GMT

जम्मू-कश्मीर:  राजौरी और पुंछ जिले में भारी बारिश, बाढ़ और फ्लैश फ्लड से पैदा हुए हालात के बीच भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने एक बार फिर अपनी तत्परता और मानवीय सेवा का उदाहरण पेश किया है। लगातार बारिश के कारण जहां कई इलाकों में सड़कें टूट गईं, पुल क्षतिग्रस्त हो गए और लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई, वहीं सेना के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए बचाव और राहत अभियान शुरू कर दिए।

व्हाइट नाइट कॉर्प्स के जवानों ने न सिर्फ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को राहत पहुंचाई, बल्कि कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों को भी रिकॉर्ड समय में बहाल किया। सेना के इन तेज अभियानों की स्थानीय लोगों ने जमकर सराहना की है।

बारिश और बाढ़ के कारण राजौरी-पुंछ क्षेत्र में कई जगहों पर भारी नुकसान हुआ। सड़कों पर मलबा जमा हो गया और कई रास्ते बंद हो गए। ऐसी स्थिति में सेना की टीमों ने विशेष उपकरणों के साथ राहत कार्य शुरू किया और लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था को भी सामान्य करने का काम किया।

पुंछ के जरां वाली गली क्षेत्र में पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय की चारदीवारी तेज बारिश के कारण गिर गई थी। दीवार गिरने से कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और NH-144A पर यातायात बाधित हो गया। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना मिलते ही व्हाइट नाइट कॉर्प्स के जवान मौके पर पहुंचे और बिना समय गंवाए राहत अभियान शुरू किया।

जवानों ने मलबा हटाने के लिए आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया और सड़क पर फंसे वाहनों को बाहर निकाला। उनके लगातार प्रयासों से कुछ ही घंटों में हाईवे पर आवाजाही फिर से शुरू हो गई। सेना की इस त्वरित कार्रवाई से यात्रियों को बड़ी राहत मिली।

इसी तरह पुंछ के खारी करमारा इलाके में भारी बारिश और तेज बहाव के कारण एक महत्वपूर्ण पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल टूटने से आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया और लोगों को आने-जाने में परेशानी होने लगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए व्हाइट नाइट कॉर्प्स के जवानों ने तुरंत मरम्मत कार्य शुरू किया।

इस अभियान में 79 RCC (BRO) और स्थानीय लोगों ने भी सेना का सहयोग किया। खराब मौसम और कठिन परिस्थितियों के बावजूद जवानों ने लगातार काम करते हुए मात्र तीन घंटे के भीतर पुल को फिर से चालू कर दिया। पुल बहाल होने के बाद स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली और जरूरी सेवाओं की आवाजाही दोबारा शुरू हो सकी।

इसके अलावा पुंछ के दारा सांगला क्षेत्र में सेना की मेडिकल टीम ने भी साहसिक अभियान चलाया। फ्लैश फ्लड के कारण वहां एक लोहे का पुल बह गया था, जिससे पूरा गांव आसपास के क्षेत्रों से कट गया था। लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने में भी मुश्किल हो रही थी।

ऐसे कठिन हालात में भारतीय सेना की मेडिकल टीम ने जोखिम उठाते हुए लकड़ी के अस्थायी पुल के जरिए उफनते नाले को पार किया और ग्रामीणों तक पहुंच बनाई। टीम ने मौके पर पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच की और जरूरतमंदों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया।

मेडिकल टीम ने एक घायल नागरिक का इलाज किया और महिलाओं, बच्चों सहित कई ग्रामीणों को जरूरी दवाएं उपलब्ध कराईं। समय पर मिली चिकित्सा सहायता से कई लोगों की स्थिति बेहतर हुई और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद मिली।

व्हाइट नाइट कॉर्प्स के इन अभियानों ने एक बार फिर साबित किया है कि भारतीय सेना प्राकृतिक आपदाओं के समय भी लोगों की सुरक्षा और सहायता के लिए हमेशा तैयार रहती है। सेना के जवानों ने खराब मौसम, कठिन रास्तों और जोखिम भरी परिस्थितियों के बावजूद जिस तेजी और समर्पण के साथ काम किया, वह उनकी कार्यक्षमता और सेवा भावना को दर्शाता है।

राजौरी-पुंछ में चलाए गए इन राहत अभियानों के जरिए सेना ने न केवल महत्वपूर्ण मार्गों को बहाल किया, बल्कि प्रभावित परिवारों तक समय पर मदद पहुंचाकर लोगों का विश्वास भी मजबूत किया। स्थानीय नागरिकों ने सेना के इस प्रयास की सराहना करते हुए जवानों को धन्यवाद दिया है।

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