श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए विधानसभा में पेश आंकड़ों ने प्रशासन के सामने रोजगार से जुड़ी बड़ी चुनौती को उजागर किया है। सरकार ने विधानसभा में जानकारी दी है कि विभिन्न सरकारी विभागों में कुल 38,872 पद रिक्त हैं। इनमें राजपत्रित (गैजेटेड), गैर राजपत्रित (नॉन गैजेटेड) और मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) के पद शामिल हैं।

यह जानकारी विधायक इरफान हाफिज लोन के तारांकित प्रश्न के जवाब में सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर विधानसभा में दी गई। सरकार ने बताया कि खाली पदों को भरने की प्रक्रिया और संबंधित मामलों की समीक्षा की जा रही है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल रिक्त पदों में 3,318 गैजेटेड पद, 24,427 नॉन गैजेटेड पद और 11,127 मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) के पद शामिल हैं। इन रिक्तियों को देखते हुए सरकारी विभागों में मानव संसाधन की कमी का मुद्दा सामने आया है।

सरकारी नौकरी को जम्मू-कश्मीर में युवाओं के लिए रोजगार का एक प्रमुख माध्यम माना जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में पदों का खाली होना नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन गया है।

विधानसभा में सरकार ने यह भी बताया कि इन रिक्त पदों के अलावा बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी भी हैं जो अस्थायी, कैजुअल, मौसमी, संविदा और जरूरत के आधार पर सेवाएं दे रहे हैं। इन कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा अभी विचाराधीन है।

सरकार के अनुसार, अस्थायी कर्मचारियों से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति 19 मार्च 2025 के सरकारी आदेश संख्या 384-जेके(जीएडी) के तहत बनाई गई है। समिति पूरे मामले का अध्ययन कर रही है और आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।

रिक्त पदों और अस्थायी कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। कर्मचारी संगठन और नौकरी की तैयारी कर रहे युवा समय-समय पर स्थायी नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रिया में तेजी की मांग उठाते रहे हैं।

विधानसभा में पेश आंकड़ों के बाद सरकारी विभागों में भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी ध्यान केंद्रित हुआ है। युवाओं की मांग रही है कि खाली पदों को जल्द भरा जाए, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ सकें और विभागों का कामकाज भी बेहतर हो सके।

गैजेटेड पदों में अधिकारियों स्तर की नियुक्तियां आती हैं, जबकि नॉन गैजेटेड पदों में विभिन्न विभागों के अन्य महत्वपूर्ण पद शामिल होते हैं। वहीं एमटीएस पदों पर सहायक स्तर के कार्यों के लिए नियुक्तियां की जाती हैं।

सरकार ने विधानसभा में यह स्पष्ट किया कि रिक्त पदों को लेकर विभागीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है और आवश्यक प्रक्रिया के तहत आगे कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सभी पदों को भरने के लिए भर्ती प्रक्रिया कब तक शुरू होगी।

जम्मू-कश्मीर में सरकारी रोजगार को लेकर युवाओं में काफी रुचि रहती है। निजी क्षेत्र के सीमित अवसरों के कारण बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं। ऐसे में विभागों में खाली पड़े हजारों पदों को रोजगार के संभावित अवसरों के रूप में देखा जा रहा है।

वहीं, अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला भी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। सरकार की ओर से गठित समिति इस विषय पर विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रिक्त पदों को भरने से न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि सरकारी विभागों की कार्यक्षमता में भी सुधार हो सकता है। हालांकि भर्ती प्रक्रिया में नियमों, वित्तीय संसाधनों और विभागीय जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी होता है।

फिलहाल जम्मू-कश्मीर सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर खाली पड़े हजारों सरकारी पदों को भरना है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से सेवाएं दे रहे अस्थायी कर्मचारियों के भविष्य को लेकर भी निर्णय लेना है।

विधानसभा में सामने आए इन आंकड़ों के बाद अब युवाओं की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर है। सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि रिक्त पदों को भरने और भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए सरकार क्या कदम उठाती है।

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