Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) द्वारा लाहौल क्षेत्र में चल रही सड़क चौड़ीकरण परियोजना के चलते प्रभावित ग्रामीणों ने राहत राशि और मुआवजा पैकेज पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिग्रहित ज़मीन के लिए दी गई राशि बाजार मूल्य के अनुरूप नहीं है और उन्होंने सही मुआवजे की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना से उनकी कृषि भूमि और निजी संपत्ति प्रभावित हुई है। राहत राशि कम होने के कारण कई परिवारों को अपने जीवनयापन में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि भूमि के सही मूल्यांकन और उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए।
एक ग्रामीण ने बताया, “हम समझते हैं कि सड़क का विकास जरूरी है, लेकिन हमारी जमीन की कीमत और नुकसान का मुआवजा वास्तविक और न्यायसंगत होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि यदि मुआवजा उचित नहीं मिला, तो वे उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज करने और आंदोलन की संभावना पर विचार कर रहे हैं।
BRO अधिकारियों ने कहा कि परियोजना के तहत मुआवजा प्रक्रिया सरकारी नियमों और अधिनियमों के अनुसार की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से देखा जाएगा और अगर आवश्यक हुआ तो मुआवजे की समीक्षा की जाएगी।
इस परियोजना का उद्देश्य लाहौल क्षेत्र की सड़क यातायात सुरक्षा और कनेक्टिविटी बढ़ाना है। BRO ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण से भारी वाहन, यात्री और व्यापारिक गतिविधियों में सुगमता आएगी। हालांकि, स्थानीय लोगों की सहमति और उचित मुआवजा के बिना विकास कार्य विवादास्पद हो सकता है।
ग्रामीणों और प्रशासन के बीच बैठकें भी आयोजित की गई हैं। इस दौरान भूमि मूल्यांकन, मुआवजा पैकेज और प्रभावित परिवारों के हितों पर चर्चा की गई। ग्रामीणों ने अधिकारियों से आग्रह किया कि वास्तविक जमीन की कीमत पर ही मुआवजा दिया जाए ताकि उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित न हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क विकास परियोजनाओं में स्थानीय लोगों का सहयोग और पारदर्शिता महत्वपूर्ण है। मुआवजे में संतुलन नहीं होने पर परियोजना के संचालन में विलंब और विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
लाहौल के ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन और BRO से उचित समाधान और संवाद के माध्यम से विवाद समाधान का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ग्रामीणों की मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सड़क चौड़ीकरण परियोजना पर प्रभाव पड़ सकता है।
इस प्रकार, BRO रोड चौड़ीकरण परियोजना और लाहौल के ग्रामीणों के बीच राहत राशि और मुआवजा विवाद ने विकास और स्थानीय हितों के संतुलन पर महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सभी हितधारकों की भागीदारी और उचित समाधान के साथ परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।