शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सरकार पर लगाए जा रहे बदले की भावना से कार्रवाई करने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही स्थापित करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछली व्यवस्थाओं में जहां भी खामियां सामने आई हैं, उन्हें दूर करने के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं।
सुक्खू ने हमीरपुर कर्मचारी चयन आयोग से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि आयोग को भंग करने का फैसला पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था बनाने के उद्देश्य से लिया गया था। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली भर्तियों में प्रक्रिया को और मजबूत किया गया है। नई व्यवस्था के तहत लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों के अंकों को जोड़कर अंतिम मेरिट तैयार की जाएगी। इससे चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह के पक्षपात की संभावना कम होगी और योग्य उम्मीदवारों को बेहतर अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसी भर्ती व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें हर अभ्यर्थी को समान अवसर मिले और किसी को भी यह शिकायत न हो कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और भाजपा विधायकों से सदन में तथ्यों के साथ चर्चा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल वॉकआउट करने से जनता के मुद्दों का समाधान नहीं होगा।
सुक्खू ने कहा कि सरकार चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है और विपक्ष को भी सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे बड़ा मंच है, जहां प्रदेश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुले तौर पर बहस होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 20 वर्षों में पहली बार हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 10 दिनों का रखा गया है। उन्होंने कहा कि इस लंबे सत्र का उद्देश्य प्रदेश के विकास, जनहित और नीतिगत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करना है।
उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह सदन की कार्यवाही में भाग ले और सरकार से सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर जवाब देने के लिए तैयार है।
सुक्खू ने यह भी कहा कि प्रदेश की संपदा और संसाधनों के उपयोग से जुड़े मामलों पर सरकार जल्द ही ‘व्हाइट पेपर’ लाएगी। इसमें प्रदेश की संपत्तियों, संसाधनों और पिछले वर्षों में हुए फैसलों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।
उन्होंने कहा कि व्हाइट पेपर के जरिए जनता को तथ्यों की जानकारी दी जाएगी और यह स्पष्ट किया जाएगा कि प्रदेश के संसाधनों का किस तरह इस्तेमाल हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता के हितों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
वहीं, विपक्ष लगातार सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाता रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार जांच एजेंसियों और प्रशासनिक फैसलों का इस्तेमाल विपक्ष को घेरने के लिए कर रही है।
सत्ता पक्ष का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को राजनीति से जोड़ना उचित नहीं है। सरकार का दावा है कि सभी फैसले नियमों और तथ्यों के आधार पर लिए जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, हिमाचल में भर्ती प्रक्रिया, भ्रष्टाचार के आरोप और सरकारी संपदा के मुद्दे आने वाले विधानसभा सत्र में प्रमुख राजनीतिक विषय बन सकते हैं।
फिलहाल मुख्यमंत्री सुक्खू ने साफ कर दिया है कि सरकार पारदर्शी व्यवस्था बनाने के लिए अपने फैसलों पर आगे बढ़ेगी और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगी।