Shimla: हिमाचल में 2 अक्टूबर से लागू होगी ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना
हिमाचल में ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना का आगाज 2 अक्टूबर से
शिमला: हिमाचल प्रदेश में अति निर्धन परिवारों को आर्थिक सहारा देने के लिए 2 अक्तूबर से शुरू होने जा रही ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ में पात्रता को लेकर स्थिति अब स्पष्ट होने लगी है। योजना में परिवार का गरीब होना ही पर्याप्त नहीं होगा। पहले यह देखा जाएगा कि परिवार सरकार की तय की गई समावेशन श्रेणियों में आता है या नहीं। इसके बाद आय, जमीन, नौकरी और आयकर से जुड़ी शर्तों की जांच होगी। दोनों स्तरों पर पात्र पाए जाने वाले परिवारों को ही योजना का अंतिम लाभ मिलेगा। सरकार ने परिवारों के चयन के लिए दो चरणों की व्यवस्था की है। पहले संभावित पात्र परिवारों का पूल तैयार होगा और दूसरे चरण में इस पूल में शामिल परिवारों की विस्तृत छंटनी की जाएगी।
छह श्रेणियों में आने वाले परिवार पहले चरण में होंगे शामिल
सरकार ने संभावित पात्र परिवारों की पहचान के लिए छह प्रमुख श्रेणियां तय की हैं। इनमें ऐसे परिवार शामिल होंगे जिनमें 27 वर्ष से कम आयु के अनाथ बच्चे ही सदस्य हों। ऐसे परिवार भी इस दायरे में आएंगे जिनमें केवल 59 वर्ष से अधिक उम्र के सदस्य हों और 27 से 59 वर्ष की उम्र का कोई वयस्क सदस्य परिवार में न हो। महिला मुखिया वाले परिवारों को भी शामिल किया गया है, लेकिन इसमें भी यह शर्त रखी गई है कि परिवार में 27 से 59 वर्ष की उम्र का कोई वयस्क सदस्य नहीं होना चाहिए। इस श्रेणी में विधवा, अविवाहित, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं के परिवार शामिल होंगे। इसके अलावा 40 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता वाले मुखिया के परिवार भी संभावित पात्र माने जाएंगे। पिछले वित्तीय वर्ष में परिवार के सभी वयस्क सदस्यों द्वारा मनरेगा के तहत कम से कम एक दिन काम किए गए परिवारों को भी इस पूल में शामिल किया जाएगा। गंभीर बीमारी के कारण कमाऊ सदस्य के स्थायी रूप से अक्षम होने वाले परिवार तथा दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से कमाऊ सदस्य के स्थायी रूप से दिव्यांग या बिस्तर पर होने वाले परिवार भी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे।
मनरेगा में एक दिन काम किया तो भी सीधे नहीं मिलेगा लाभ
योजना की पात्रता को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मनरेगा में एक दिन काम करना अपने आप में अंतिम पात्रता नहीं है। यदि परिवार के सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत कम से कम एक दिन काम किया है तो परिवार समावेशन की शर्त पूरी कर संभावित पात्र परिवारों के पूल में आ सकता है। इसके बाद उसकी आर्थिक स्थिति और दूसरी शर्तों की जांच होगी। सरकार ने अंतिम चयन के लिए चार बहिष्करण शर्तें तय की हैं। परिवार की सभी स्रोतों से सालाना आय 75 हजार रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। परिवार के पास एक हेक्टेयर से अधिक जमीन नहीं होनी चाहिए। परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी, अर्धसरकारी या निजी नौकरी में नहीं होना चाहिए और परिवार का कोई सदस्य आयकरदाता भी नहीं होना चाहिए। इनमें से किसी एक शर्त के सामने आने पर परिवार को अंतिम लाभार्थी सूची से बाहर कर दिया जाएगा।
पूल में नाम आने के बाद होगी अंतिम जांच, सभी शर्तें पूरी करना जरूरी
इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे अति निर्धन परिवारों तक आर्थिक सहायता पहुंचाना है, जो दूसरी सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित रह गए हैं। उदाहरण के लिए यदि किसी परिवार के सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा में कम से कम एक दिन काम किया है तो वह संभावित पात्र परिवारों के पूल में शामिल हो सकता है। लेकिन जांच में यदि उसकी सालाना आय 75 हजार रुपये से अधिक पाई जाती है तो उसे अंतिम सूची से बाहर कर दिया जाएगा। दूसरी ओर, यदि परिवार की आय 75 हजार रुपये या इससे कम है और उसके पास एक हेक्टेयर से अधिक जमीन नहीं है, परिवार का कोई सदस्य सरकारी, अर्धसरकारी या निजी नौकरी में नहीं है तथा कोई सदस्य आयकरदाता नहीं है, तो वह अंतिम रूप से पात्र माना जा सकता है। यानी योजना में पहले समावेशन की शर्त पूरी करना जरूरी है और उसके बाद बहिष्करण की चारों शर्तों से बाहर रहना भी आवश्यक होगा। दोनों स्तरों की जांच पूरी होने के बाद ही परिवार को ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ का लाभ मिल सकेगा।