शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के हजारों पेंशनरों को महंगाई भत्ते (डीए) और अन्य लंबित वित्तीय लाभों के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। बुधवार को भी पेंशनरों की मांगों पर प्रदेश सरकार कोई अंतिम निर्णय नहीं ले सकी। अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन की ओर से महंगाई भत्ते सहित अन्य मांगों से संबंधित फाइल उपमुख्यमंत्री कार्यालय भेज दी गई है। हालांकि, उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री मुकेश अग्निहोत्री के शिमला से बाहर होने के कारण इस पर अंतिम फैसला नहीं हो सका। इससे पेंशनरों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है।

जानकारी के अनुसार, रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नंद लाल के निधन के कारण उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा। वह दिल्ली से लौटने के बाद रामपुर पहुंचे, जहां उन्होंने दिवंगत विधायक को श्रद्धांजलि दी। बुधवार को विधायक नंद लाल का उनके पैतृक गांव देवठी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू सहित प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। उपमुख्यमंत्री की व्यस्तता के चलते एचआरटीसी पेंशनरों की मांगों से संबंधित फाइल पर निर्णय नहीं हो पाया।

उधर, लंबे समय से लंबित वित्तीय लाभों को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे पेंशनरों को निगम प्रबंधन ने एक दिन और इंतजार करने के लिए मना लिया है। प्रबंधन की ओर से मांगों पर सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, पेंशनर संगठनों का कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। सरकार को जल्द स्पष्ट आदेश जारी करने होंगे, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनका बकाया भुगतान मिल सके।

दरअसल, एचआरटीसी के पेंशनर पिछले काफी समय से महंगाई भत्ते, बकाया एरियर, चिकित्सा बिलों के भुगतान और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार के दूसरे विभागों से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का लाभ मिल चुका है, लेकिन परिवहन निगम के पेंशनरों को अभी तक इसका पूरा लाभ नहीं मिला है। इसी अंतर को समाप्त करने के लिए पेंशनर संगठन लगातार सरकार और निगम प्रबंधन से बातचीत कर रहे हैं।

पेंशनरों की प्रमुख मांग कुल आठ प्रतिशत महंगाई भत्ते के भुगतान से संबंधित है। इसमें पहले से लंबित तीन प्रतिशत डीए और हाल में घोषित पांच प्रतिशत डीए शामिल है। पेंशनर संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच निर्धारित पेंशन से घर का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में डीए का भुगतान मिलने से उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी।

प्रदेश सरकार ने हाल ही में अपने कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए पांच प्रतिशत महंगाई भत्ते की घोषणा की थी। इसके बाद एचआरटीसी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने भी समान लाभ दिए जाने की मांग तेज कर दी। उनका कहना है कि जीवनभर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय लाभों के लिए बार-बार संघर्ष नहीं करना पड़ना चाहिए।

मंगलवार को एचआरटीसी के अधिकारियों और अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। बैठक में निगम कर्मचारियों के वेतन, पेंशनरों के महंगाई भत्ते और लंबित चिकित्सा बिलों सहित विभिन्न वित्तीय देनदारियों पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने उपलब्ध वित्तीय संसाधनों और भुगतान की संभावनाओं पर विचार किया। इसके बाद संबंधित प्रस्ताव उपमुख्यमंत्री कार्यालय भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

एचआरटीसी में कार्यरत करीब 11 हजार कर्मचारियों के वेतन भुगतान का मामला भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। कर्मचारियों की मांग है कि हर महीने निर्धारित समय पर वेतन मिले। त्योहारों के मद्देनजर वेतन और महंगाई भत्ते का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि भुगतान में देरी होने से घरेलू बजट प्रभावित होता है और आवश्यक खर्चों के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।

पेंशनर संगठनों ने इससे पहले अपनी मांगों को लेकर सरकार को अल्टीमेटम दिया था। चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय तक मांगें पूरी नहीं होने पर निगम मुख्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। पेंशनरों ने तीन नवंबर से आंदोलन शुरू करने की तैयारी भी की थी। हालांकि, प्रबंधन के साथ बातचीत और जल्द निर्णय की उम्मीद के बीच फिलहाल आंदोलन को लेकर इंतजार किया जा रहा है।

पेंशनरों का कहना है कि कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों की आय का मुख्य साधन पेंशन ही है। उम्र बढ़ने के साथ चिकित्सा संबंधी खर्च भी बढ़ जाते हैं। ऐसे में महंगाई भत्ते और चिकित्सा बिलों के भुगतान में देरी बुजुर्ग पेंशनरों के लिए अतिरिक्त आर्थिक परेशानी पैदा करती है। विशेष रूप से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों के परिवारों को समय पर भुगतान की जरूरत होती है।

इसके अलावा सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन शुरू होने में देरी का मुद्दा भी लगातार उठाया जा रहा है। पेंशनर संगठनों के अनुसार, कुछ पूर्व कर्मचारियों को पेंशन भुगतान आदेश जारी होने के बाद भी नियमित भुगतान शुरू होने का इंतजार करना पड़ा है। संगठन चाहते हैं कि निगम ऐसी व्यवस्था बनाए, जिससे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और अन्य वित्तीय लाभ तय समय पर मिल सकें।

एचआरटीसी प्रबंधन के सामने कर्मचारियों के वेतन और पेंशनरों के वित्तीय लाभों के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाना एक बड़ी चुनौती है। निगम को परिचालन खर्च के साथ कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों की देनदारियां भी पूरी करनी होती हैं। ऐसे में सरकार के स्तर पर वित्तीय सहायता और भुगतान संबंधी निर्णय महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

फिलहाल सबकी निगाहें उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के अगले निर्णय पर टिकी हैं। पेंशनरों को उम्मीद है कि फाइल पर जल्द स्वीकृति मिलेगी और दिवाली से पहले उन्हें राहत मिल सकेगी। हालांकि, जब तक सरकार की ओर से औपचारिक आदेश जारी नहीं होता, तब तक भुगतान की तारीख स्पष्ट नहीं कही जा सकती। पेंशनर संगठनों ने संकेत दिया है कि जल्द समाधान नहीं निकलने पर वे आंदोलन की रणनीति पर दोबारा विचार कर सकते हैं।

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