पॉलिटेक्निक छात्र सर्वेश शर्मा की बड़ी उपलब्धि रक्षा मंत्रालय से मिले 3.5 करोड़
शिमला। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक के छात्र सर्वेश शर्मा ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय सेना के लिए स्वदेशी ‘रुद्र एज T-1 (स्पेक्ट्रा)’ ड्रोन विकसित करने की परियोजना के लिए उन्हें रक्षा मंत्रालय से 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली है। बुधवार को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने सर्वेश शर्मा को उनकी इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया और उनके नवाचार की सराहना की।राज्यपाल ने कहा कि सर्वेश शर्मा की उपलब्धि हिमाचल प्रदेश के युवाओं में मौजूद प्रतिभा, तकनीकी क्षमता और नई सोच को सामने लाती है। उन्होंने स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करने की दिशा में सर्वेश के समर्पण, दूरदर्शिता और मेहनत की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह के नवाचार देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी की तलाश तक सीमित रहने के बजाय अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। तकनीक के क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच युवाओं के पास देश की जरूरतों के अनुरूप नए समाधान विकसित करने के बड़े अवसर मौजूद हैं।
भारतीय सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन
सर्वेश शर्मा की परियोजना भारतीय सेना के लिए स्वदेशी ड्रोन तकनीक विकसित करने से जुड़ी है। ‘रुद्र एज T-1 (स्पेक्ट्रा)’ नामक ड्रोन को रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया जा रहा है।रक्षा क्षेत्र में ड्रोन तकनीक का महत्व लगातार बढ़ा है। निगरानी, टोही और दुर्गम क्षेत्रों में सूचनाएं जुटाने जैसे कई कार्यों में मानव रहित हवाई प्रणालियों का इस्तेमाल किया जाता है। भारत भी रक्षा उपकरणों और महत्वपूर्ण तकनीकों के स्वदेशी विकास पर लगातार जोर दे रहा है।ऐसे में छात्र स्तर पर विकसित होने वाली तकनीकी परियोजनाओं को सरकारी सहयोग मिलने से नए इनोवेटर्स को प्रोत्साहन मिलने के साथ रक्षा क्षेत्र में घरेलू अनुसंधान को भी बढ़ावा मिल सकता है।सर्वेश शर्मा को रक्षा मंत्रालय से मिली 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट उनके प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में मदद करेगी। इस राशि के माध्यम से ड्रोन के विकास, परीक्षण और परियोजना से जुड़े दूसरे तकनीकी कार्यों को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
राज्यपाल ने किया सम्मानित
बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने सर्वेश शर्मा को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य से निकलकर किसी युवा का रक्षा तकनीक के क्षेत्र में इस तरह की उपलब्धि हासिल करना दूसरे विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को नए प्रयोग करने और तकनीकी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। युवाओं को सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलने पर वे राष्ट्रीय स्तर की परियोजनाओं में योगदान दे सकते हैं।राज्यपाल ने सर्वेश की उपलब्धि को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं बताया बल्कि इसे प्रदेश के युवाओं की क्षमता का उदाहरण बताया।
आत्मनिर्भर भारत से जुड़ी पहल
राज्यपाल ने इस उपलब्धि को ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं का विकास राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल है। देश के भीतर ही आधुनिक उपकरणों और प्रणालियों का विकास होने से आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में मदद मिलती है।भारत पिछले कुछ वर्षों से रक्षा उत्पादन और अनुसंधान में घरेलू भागीदारी बढ़ाने पर जोर देता रहा है। स्टार्टअप, निजी उद्योग, शिक्षण संस्थान और युवा इनोवेटर भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बन रहे हैं।सर्वेश शर्मा की ड्रोन परियोजना को इसी व्यापक प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है। रक्षा मंत्रालय से मिली वित्तीय सहायता से परियोजना को प्रयोगशाला या शुरुआती मॉडल से आगे ले जाकर अधिक विकसित स्तर तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है।
तकनीकी शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा
गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक हमीरपुर के छात्र की इस उपलब्धि ने तकनीकी और पॉलिटेक्निक शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया है। पॉलिटेक्निक संस्थानों में विद्यार्थी इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े व्यावहारिक कौशल हासिल करते हैं। ऐसे संस्थानों में नवाचार और प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा को बढ़ावा मिलने से विद्यार्थियों को वास्तविक समस्याओं पर काम करने का अवसर मिलता है।सर्वेश की उपलब्धि उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरक है जो छोटे शहरों या सीमित संसाधनों के बीच तकनीकी क्षेत्र में कुछ नया करने का प्रयास कर रहे हैं।राज्यपाल ने भी युवाओं से अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल देश और समाज की समस्याओं के समाधान के लिए करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के विचार और तकनीकी कौशल भारत को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
ड्रोन तकनीक का बढ़ रहा महत्व
आधुनिक रक्षा व्यवस्था में ड्रोन तेजी से महत्वपूर्ण तकनीक के रूप में उभरे हैं। सीमावर्ती इलाकों की निगरानी से लेकर वास्तविक समय में जानकारी जुटाने तक कई क्षेत्रों में इनका उपयोग संभव है। पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में भी मानव रहित प्रणालियां उपयोगी साबित हो सकती हैं।इसी कारण स्वदेशी ड्रोन तकनीक विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। घरेलू स्तर पर विकसित प्रणालियों का एक लाभ यह भी है कि उन्हें भारतीय परिस्थितियों और उपयोगकर्ता की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जा सकता है।हालांकि किसी भी रक्षा तकनीक को वास्तविक सैन्य उपयोग में शामिल करने से पहले विभिन्न स्तरों पर परीक्षण, मूल्यांकन और निर्धारित मानकों को पूरा करना आवश्यक होता है। सर्वेश की परियोजना को मिली ग्रांट इसके विकास की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग है।
युवाओं के नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर
सर्वेश शर्मा को सम्मानित करते हुए राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश के शिक्षण संस्थानों में नवाचार की संस्कृति को और मजबूत किया जाना चाहिए। विद्यार्थियों को शोध और नई तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने से राज्य में तकनीकी उद्यमिता के अवसर भी बढ़ सकते हैं।उन्होंने सर्वेश के भविष्य के प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि उनकी उपलब्धि हिमाचल प्रदेश के दूसरे युवाओं को भी विज्ञान, तकनीक और रक्षा नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।रक्षा मंत्रालय से 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट हासिल करने और भारतीय सेना के लिए ‘रुद्र एज T-1 (स्पेक्ट्रा)’ ड्रोन विकसित करने की पहल ने सर्वेश शर्मा को प्रदेश के युवा इनोवेटर्स के बीच खास पहचान दिलाई है। अब इस परियोजना के अगले चरण और इसके तकनीकी विकास पर नजर रहेगी।