शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार राज्य में आयुर्वेद, योग, पंचकर्म और अन्य पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को स्वास्थ्य सेवाओं के महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में विस्तार देने की दिशा में काम कर रही है। आयुष मंत्री यदविंदर गोमा ने बुधवार को कहा कि सरकार का उद्देश्य इन सेवाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना और आयुर्वेद को केवल उपचार पद्धति के बजाय स्वस्थ जीवन शैली के रूप में बढ़ावा देना है।शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में आयोजित आयुर्वेद दिवस कार्यक्रम के दौरान गोमा ने कहा कि राज्य में पंचकर्म, योग और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कार्यक्रम का उद्घाटन करने के साथ ही यहां लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। प्रदर्शनी में आयुष विभाग की ओर से आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों से संबंधित गतिविधियों और उपचार पद्धतियों की जानकारी दी गई।
आयुष मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में लोगों के बीच आयुर्वेद और योग के प्रति रुचि बढ़ी है। लोग अब स्वास्थ्य समस्याओं के उपचार के साथ-साथ बेहतर जीवन शैली और रोगों से बचाव के लिए भी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की ओर देख रहे हैं। ऐसे में सरकार इन सेवाओं को मजबूत करने और आम लोगों तक इनकी पहुंच बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है।उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश में आयुर्वेद की पुरानी और समृद्ध परंपरा रही है। राज्य की भौगोलिक और प्राकृतिक परिस्थितियां औषधीय पौधों के लिए भी अनुकूल हैं। इसी वजह से प्रदेश में आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा को आगे बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। सरकार इन संभावनाओं को स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़कर लोगों को लाभ पहुंचाने की दिशा में प्रयास कर रही है।
गेयटी थिएटर में आयोजित कार्यक्रम में आयुष विभाग ने विभिन्न स्टॉल के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के बारे में जानकारी दी। लोगों को आयुर्वेदिक उपचार, पंचकर्म, योग और स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न गतिविधियों से परिचित कराया गया। प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को यह बताना था कि आयुर्वेद का इस्तेमाल केवल बीमारी होने के बाद उपचार के लिए ही नहीं बल्कि स्वस्थ जीवन शैली अपनाने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की रोकथाम के लिए भी किया जा सकता है।गोमा ने कहा कि सरकार पंचकर्म जैसी सेवाओं को अधिक स्थानों पर उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ रही है। पंचकर्म आयुर्वेद की प्रमुख उपचार पद्धतियों में शामिल है और इसके प्रति लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है। इसके साथ योग को भी दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
आयुष मंत्री ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के प्रति बढ़ती स्वीकार्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग अब स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हुए हैं। बदलती जीवन शैली के कारण कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में नियमित योग, संतुलित आहार और आयुर्वेद में बताए गए जीवन शैली संबंधी उपायों को अपनाने के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है।सरकार का प्रयास है कि आयुष से जुड़ी सुविधाएं केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी आयुर्वेदिक चिकित्सा और योग जैसी सुविधाओं को पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं को मजबूत करने और लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक वातावरण और औषधीय वनस्पतियों की उपलब्धता को देखते हुए वेलनेस पर्यटन की संभावनाएं भी हैं। पंचकर्म, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होने से स्थानीय लोगों के साथ प्रदेश आने वाले पर्यटकों को भी इन सेवाओं से जोड़ा जा सकता है। इससे स्वास्थ्य और पर्यटन क्षेत्र के बीच नए अवसर विकसित होने की संभावना है।आयुर्वेद दिवस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के महत्व और स्वस्थ जीवन शैली के बारे में जागरूक करने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में आयुर्वेद से जुड़े विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने भी लोगों को विभिन्न उपचार पद्धतियों और स्वास्थ्य संबंधी उपायों की जानकारी दी।
आयुष विभाग की प्रदर्शनी में लोगों को योग के महत्व और दैनिक जीवन में इसके उपयोग के बारे में भी बताया गया। योग को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ते हुए नियमित अभ्यास के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। इसके अलावा आयुर्वेदिक चिकित्सा और अन्य पारंपरिक प्रणालियों से जुड़ी जानकारी भी प्रदर्शित की गई।यदविंदर गोमा ने कहा कि आयुर्वेद और योग जैसी पारंपरिक प्रणालियों को आधुनिक समय की जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए जागरूकता के साथ सेवाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार का प्रयास है कि लोगों को ऐसी स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हों और वे अपनी जरूरत के अनुसार इनका लाभ उठा सकें।आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने हिमाचल प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के विस्तार को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। पंचकर्म, योग और अन्य वेलनेस सेवाओं को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने के साथ सरकार लोगों को स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दे रही है।