Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश में अवैध खनन को लेकर सियासी तनाव बढ़ गया है। कांग्रेस ने हमीरपुर के विधायक पर खनन विवाद में लापरवाही और आरोपों को लेकर करारा पलटवार किया है। पार्टी ने विधायक पर आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र में अवैध खनन गतिविधियों में उनके विरोधाभासी रुख और अनदेखी की वजह से पर्यावरण और स्थानीय समुदाय को नुकसान हुआ है।
कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हमीरपुर विधायक ने अपने कार्यकाल में अवैध खनन के मामलों को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा, “खनन नियमों का उल्लंघन सिर्फ पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचा रहा, बल्कि स्थानीय निवासियों की जिंदगी पर भी असर डाल रहा है। विधायक को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।”
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ खनन कंपनियों को विधायक के संरक्षण का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल स्थानीय नहीं, बल्कि राज्य स्तर पर गंभीर चिंता का विषय है। पार्टी ने स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विभाग से आग्रह किया कि वे जांच तेज करें और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
वहीं, हमीरपुर विधायक ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप बिना प्रमाण के और राजनीतिक उद्देश्य से बनाए गए हैं। विधायक ने कहा कि उन्होंने हमेशा नियमों के अनुसार खनन गतिविधियों की निगरानी की है और अवैध गतिविधियों पर तुरंत प्रशासन को सूचित किया।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में क्षेत्र में अवैध खनन के कारण सड़क, पर्यावरण और जल स्रोतों को नुकसान पहुंचा है। उनका कहना है कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया, तो प्राकृतिक संसाधनों पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। कई नागरिकों ने कांग्रेस के दबाव और जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह मामला आगामी चुनावों के मद्देनजर और भी गर्म हो सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का पलटवार विधायक और उनकी पार्टी के लिए चुनौती पेश करता है, और राजनीतिक मैदान में खनन जैसे पर्यावरणीय मुद्दे का प्रभाव महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अवैध खनन के मुद्दे को लेकर स्थानीय मीडिया और सामाजिक संगठन भी सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि जनता और सरकारी संस्थाओं को मिलकर सुनिश्चित करना चाहिए कि संसाधनों का संरक्षण हो और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
इस मामले में अब प्रशासन की ओर से गहन जांच और रिपोर्टिंग की संभावना है। यह देखना बाकी है कि विधायक और उनकी पार्टी इस विवाद का राजनीतिक और कानूनी हल कैसे निकालते हैं।