शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य को बड़ी संख्या में अफसरों की फौज की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे अधिकारियों की आवश्यकता है जो सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरीके से धरातल पर उतार सकें। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS), भारतीय वन सेवा (IFS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के स्वीकृत पदों की संख्या में कटौती करने जा रही है।

मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार, प्रदेश में IAS अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या 153 से घटाकर 130 की जाएगी। इसी तरह भारतीय वन सेवा (IFS) के पदों को 118 से कम करके 83 करने का निर्णय लिया गया है। वहीं भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के 96 स्वीकृत पदों की संख्या में भी कमी की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन को अधिक प्रभावी और खर्च के लिहाज से बेहतर बनाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल अधिकारियों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक मशीनरी को अधिक जवाबदेह और परिणाम देने वाली बनाना है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश का काम 100 से 110 IAS अधिकारियों से भी बेहतर तरीके से चल सकता है, लेकिन अधिकारियों की ओर से मिले सुझावों को ध्यान में रखते हुए 130 पद रखने का फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जरूरत के अनुसार अधिकारियों की संख्या तय करना जरूरी है, ताकि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो सके।

मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि एक IAS अधिकारी पर सरकार को करीब 200 करोड़ रुपये तक का खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था में संतुलन बनाए रखना और खर्च को नियंत्रित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों वाले राज्य में हर खर्च का बेहतर प्रबंधन होना चाहिए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का ध्यान अधिकारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने पर है। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो आम जनता की समस्याओं को समझें और योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कई योजनाएं जनता के कल्याण के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन उनका वास्तविक लाभ तभी मिल सकता है जब उन्हें जमीन पर सही तरीके से लागू किया जाए। इसके लिए कुशल और जिम्मेदार अधिकारियों की आवश्यकता होती है।

उन्होंने प्रशासनिक सुधारों को राज्य की जरूरत बताते हुए कहा कि सरकार व्यवस्था में बदलाव कर रही है ताकि कामकाज तेज, पारदर्शी और प्रभावी हो सके। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की संख्या कम करने का मतलब प्रशासन को कमजोर करना नहीं है, बल्कि इसे अधिक सक्षम बनाना है।

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में प्रशासनिक खर्च और संसाधनों का प्रबंधन हमेशा से एक चुनौती रहा है। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राज्य के कई दूरदराज इलाकों तक सरकारी योजनाएं पहुंचाना कठिन होता है। ऐसे में सरकार का मानना है कि अधिकारियों की भूमिका केवल कार्यालयों तक सीमित न रहकर फील्ड स्तर पर भी प्रभावी होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य आम लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए प्रशासनिक ढांचे में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारी जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझें और समाधान के लिए काम करें।

सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, अधिकारियों के पदों में कटौती को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चर्चा भी शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पदों की संख्या कम करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि महत्वपूर्ण विभागों में पर्याप्त अधिकारी उपलब्ध रहें।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी पद या सेवा का महत्व कम करना नहीं है। बल्कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना है।

उन्होंने कहा कि राज्य को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो केवल फाइलों तक सीमित न रहें, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन और जनता की समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाएं।

प्रदेश सरकार की ओर से प्रशासनिक सेवाओं के पदों में बदलाव का फैसला ऐसे समय में लिया जा रहा है, जब सरकार खर्च कम करने और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर जोर दे रही है। सरकार का कहना है कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक चुस्त और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री सुक्खू के इस बयान के बाद राज्य में प्रशासनिक सुधारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब देखना होगा कि पदों की संख्या में कमी के बाद सरकारी कामकाज और योजनाओं के क्रियान्वयन पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

Tags: