हिमाचल के गांवों में बंदरों की दहशत, खेत छोड़ने को मजबूर किसान

Update: 2026-07-12 16:10 GMT

बिलासपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की हरिपुर तहसील के कई गांवों में बंदरों के बढ़ते आतंक ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बंदरों के उत्पात के कारण ग्रामीण अपनी फसलों को बचाने में असमर्थ हो रहे हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि कई किसानों ने खेती करना ही छोड़ दिया है और उनकी उपजाऊ जमीन धीरे-धीरे बंजर होती जा रही है।

हरिपुर तहसील के गुलेर, गठूतर, जलरियां, माला, बिलासपुर, सकरी, कटोरा, धार, धंगड़ और ठम्बा समेत आसपास के कई गांवों में बंदरों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले बंदरों का असर सीमित था, लेकिन अब इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। खेतों में तैयार फसलों को बंदर भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

किसानों के अनुसार, बंदर गेहूं, मक्का, सब्जियों और फलदार पौधों को नष्ट कर देते हैं। दिन-रात खेतों की रखवाली करने के बाद भी फसल बचाना मुश्किल हो गया है। कई बार बंदरों के झुंड खेतों में घुसकर कुछ ही समय में पूरी फसल बर्बाद कर देते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि खेती में मेहनत और खर्च करने के बाद भी उन्हें उत्पादन नहीं मिल पा रहा है। फसल बर्बाद होने से आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है। यही कारण है कि कई छोटे और सीमांत किसानों ने खेती से दूरी बना ली है।

किसानों ने बताया कि कभी जिन खेतों में हरियाली दिखाई देती थी, आज वहां घास और झाड़ियां उग रही हैं। उपजाऊ जमीन का इस्तेमाल नहीं होने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। खेती छोड़ने से लोगों की आय का एक बड़ा साधन भी खत्म हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों की समस्या केवल खेतों तक सीमित नहीं है। घरों के आसपास लगाए गए सब्जियों और फलदार पौधों को भी बंदर नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार ये घरों में घुसकर खाने-पीने की चीजें उठा ले जाते हैं, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन से बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान नहीं होगा। बंदरों की संख्या नियंत्रित करने और किसानों को राहत देने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में और अधिक लोग खेती छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द कोई ठोस योजना बनाएगा, ताकि किसान दोबारा अपने खेतों में खेती कर सकें और उनकी जमीन बंजर होने से बच सके।

Tags:    

Similar News