धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के दुर्गम और सड़क सुविधा से वंचित गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। कांगड़ा और चंबा क्षेत्र के 98 गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) इन गांवों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने में जुटा है। हालांकि सड़क परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से पहले निर्धारित तीन प्रमुख शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा।
पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा भी मानी जाती है। कई दूरदराज गांवों के लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए अभी पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। नई सड़कों के निर्माण से ग्रामीणों को बाजार, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचने में आसानी होने की उम्मीद है।
डीपीआर तैयार करने में जुटा विभाग
PWD की ओर से प्रस्तावित सड़कों के लिए सर्वेक्षण और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। डीपीआर में सड़क की प्रस्तावित लंबाई, मार्ग, निर्माण लागत, तकनीकी जरूरतों और भौगोलिक परिस्थितियों सहित विभिन्न पहलुओं का आकलन किया जाएगा। पहाड़ी इलाकों में सड़क निर्माण मैदानी क्षेत्रों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। भूस्खलन, खड़ी ढलान, नाले और कमजोर पहाड़ जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मार्ग तय करना पड़ता है। इसी कारण डीपीआर में तकनीकी सुरक्षा को विशेष महत्व दिया जाता है।
तीन शर्तें पूरी होने के बाद बढ़ेगी प्रक्रिया
इन गांवों को सड़क से जोड़ने की योजना को आगे बढ़ाने के लिए तीन निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी होगा। इनमें परियोजना के लिए आवश्यक जमीन की उपलब्धता, वन क्षेत्र से संबंधित जरूरी स्वीकृतियां और निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरा करना महत्वपूर्ण हो सकता है। संबंधित परियोजना की अंतिम स्वीकृति से पहले विभाग इन सभी पहलुओं की जांच करेगा। जिन क्षेत्रों में निजी जमीन सड़क निर्माण के दायरे में आएगी वहां भूमि उपलब्ध कराने से संबंधित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। वहीं वन भूमि प्रभावित होने की स्थिति में संबंधित विभागों से नियमानुसार मंजूरी जरूरी होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों की बदलेगी तस्वीर
सड़क सुविधा मिलने का सबसे बड़ा फायदा गांवों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को हो सकता है। कांगड़ा और चंबा के कई पहाड़ी क्षेत्रों में लोग कृषि, बागवानी, पशुपालन और पर्यटन से जुड़े हुए हैं। सड़क नहीं होने के कारण किसानों और बागवानों को अपना उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त समय और खर्च करना पड़ता है। सड़क बनने के बाद फल, सब्जियां, दूध और अन्य स्थानीय उत्पादों को आसानी से बाजार तक पहुंचाया जा सकेगा। इससे परिवहन लागत कम होने के साथ किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होने की संभावना बढ़ेगी।
मरीजों और विद्यार्थियों को बड़ी राहत
दुर्गम गांवों में सबसे बड़ी समस्या चिकित्सा आपातकाल के दौरान सामने आती है। सड़क नहीं होने पर मरीज को मुख्य मार्ग या अस्पताल तक पहुंचाने में काफी समय लग सकता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति और मुश्किल हो जाती है। सड़क संपर्क स्थापित होने से एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहन गांवों के नजदीक तक पहुंच सकेंगे। इसी तरह स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
पर्यटन को भी मिल सकता है बढ़ावा
कांगड़ा और चंबा अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थलों के लिए प्रसिद्ध हैं। कई ऐसे ग्रामीण और प्राकृतिक क्षेत्र हैं जहां सड़क सुविधा बेहतर होने से पर्यटन गतिविधियों की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। होमस्टे, स्थानीय हस्तशिल्प, खानपान और ग्रामीण पर्यटन से जुड़े लोगों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। हालांकि सड़क निर्माण के दौरान हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी को ध्यान में रखना भी जरूरी होगा।
बारिश और भूस्खलन बड़ी चुनौती
हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के साथ उसकी सुरक्षा और रखरखाव भी बड़ी चुनौती है। मानसून के दौरान भूस्खलन और पहाड़ों से मलबा गिरने के कारण कई मार्ग बाधित हो जाते हैं। इसलिए नई सड़कों के निर्माण में ड्रेनेज सिस्टम, सुरक्षा दीवार और ढलानों को स्थिर रखने जैसे उपाय महत्वपूर्ण होंगे।
PWD की डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजनाओं की वास्तविक लागत और निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलुओं की तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी। आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। कांगड़ा और चंबा के 98 गांवों को सड़क से जोड़ने की योजना साकार होती है तो हजारों ग्रामीणों के दैनिक जीवन में बड़ा बदलाव आ सकता है। बेहतर सड़क संपर्क से स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं तक पहुंच आसान होने के साथ कृषि, बागवानी, पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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