Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख परिवहन संस्था हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) अपनी गंभीर वित्तीय स्थिति से जूझते हुए अब कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों की लंबित देनदारियों का भुगतान ऋण लेकर करने की तैयारी में है। निगम पर लगभग 500 करोड़ रुपये की देनदारी लंबित है, जिसमें विभिन्न वित्तीय लाभ शामिल हैं।
इन लंबित देनदारियों में रात्रि भत्ता, ओवरटाइम भुगतान, महंगाई भत्ते (डीए) की किस्तें और अन्य वित्तीय लाभ शामिल हैं। इसके साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन और अन्य सेटलमेंट भुगतान भी समय पर नहीं किए जा सके हैं, जिससे कर्मचारियों में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, निगम की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है, जिसके चलते सामान्य खर्चों के साथ-साथ वेतन और पेंशन का भुगतान करना भी चुनौती बन गया है। हालात यह हैं कि निगम को कई बार वेतन और पेंशन के लिए राज्य सरकार से वित्तीय सहायता की गुहार लगानी पड़ती है।
इसी वित्तीय संकट को देखते हुए अब एचआरटीसी ने कर्ज लेने का निर्णय लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रस्ताव के अनुसार, निगम बैंकों से ऋण लेकर कर्मचारियों और पेंशनधारकों की लंबित देनदारियों का भुगतान करेगा।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) आरडी नजीम ने इस मुद्दे को लेकर संबंधित बैंकों के प्रबंध निदेशकों से बातचीत की है। प्रारंभिक स्तर पर ऋण प्रक्रिया को लेकर सहमति और संभावनाओं पर चर्चा की गई है।
सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को जल्द ही एचआरटीसी के निदेशक मंडल की बैठक में पेश किया जाएगा, जहां इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद निगम औपचारिक रूप से बैंकों से ऋण के लिए आवेदन करेगा।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लंबे समय से भुगतान न होने के कारण कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। वहीं सेवानिवृत्त कर्मियों को भी अपने हक की राशि के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते निगम की वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो भविष्य में संचालन पर भी असर पड़ सकता है। एचआरटीसी राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, और इसकी वित्तीय स्थिरता सीधे तौर पर आम जनता की सेवाओं से जुड़ी है।
सरकार और निगम प्रबंधन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय संतुलन बनाए रखते हुए कर्मचारियों के अधिकारों का समय पर भुगतान सुनिश्चित करना है।
फिलहाल, ऋण के माध्यम से भुगतान का प्रस्ताव एक अस्थायी समाधान माना जा रहा है, जबकि दीर्घकालिक सुधार के लिए ठोस वित्तीय योजना की आवश्यकता बताई जा रही है।