शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को स्थगित प्रश्नों के जवाब नहीं मिलने को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। बार-बार सवाल लगाए जाने के बावजूद विभागों की ओर से सूचना एकत्र नहीं होने पर विपक्षी विधायकों ने नाराजगी जताई। भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यहां तक कहा कि यदि सरकार को उनके प्रश्न का जवाब ही नहीं देना है तो प्रश्न को सदन की कार्यवाही से विलोप कर दिया जाए।

मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि आखिर सरकार विधायकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का जवाब देने से क्यों बच रही है। जयराम ठाकुर ने कहा कि सदन में विधायकों को आवश्यक सूचना उपलब्ध नहीं कराना गंभीर विषय है।

स्थगित प्रश्नों के जवाब पर उठा विवाद

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान उन प्रश्नों को लेकर विपक्ष ने आपत्ति जताई, जिनकी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई थी। विपक्षी सदस्यों का कहना था कि कई सवाल पहले भी लगाए जा चुके हैं, लेकिन बार-बार विभागों की ओर से सूचना एकत्र किए जाने की बात कही जा रही है।

विपक्ष ने इसे विधायकों के अधिकारों और सदन की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा। सदस्यों ने कहा कि विधानसभा में प्रश्न पूछने का उद्देश्य सरकार से संबंधित विषयों पर आधिकारिक और तथ्यात्मक जानकारी हासिल करना है।

यदि लंबे समय तक सवालों के जवाब नहीं मिलते हैं तो प्रश्नकाल की उपयोगिता पर भी सवाल खड़े होते हैं।

सुधीर शर्मा बोले प्रश्न ही विलोप कर दें

विधायक सुधीर शर्मा ने अपने एक प्रश्न का जवाब नहीं मिलने पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा मांगी गई जानकारी के कुछ हिस्से दूसरे प्रश्नों के जवाब में पहले ही सामने आ चुके हैं।

ऐसे में शेष जानकारी जुटाने में इतनी देरी क्यों हो रही है, इसका जवाब दिया जाना चाहिए।

सुधीर शर्मा ने कहा कि यदि सरकार को उनके सवाल का जवाब देना ही नहीं है तो उनके प्रश्न को विलोप कर दिया जाए। उनकी इस टिप्पणी के बाद सदन में स्थगित प्रश्नों और लंबित जवाबों का मुद्दा प्रमुखता से उठ गया।

सरकार जवाब देने से क्यों कतरा रही: जयराम

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि आखिर सरकार विधानसभा में पूछे गए सवालों का जवाब देने से क्यों कतरा रही है।

उन्होंने कहा कि विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों और प्रदेश से जुड़े विभिन्न विषयों पर सरकार से जानकारी मांगते हैं। सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है कि तय प्रक्रिया के तहत जानकारी सदन में उपलब्ध कराई जाए।

जयराम ठाकुर ने कहा कि विधायकों को सूचना से वंचित रखना उचित नहीं है। उन्होंने इसे सदन के सदस्यों के अधिकारों से जुड़ा मामला बताया।

पांच मिनट में जुटाई जा सकती है जानकारी

नेता प्रतिपक्ष ने विशेष रूप से मुख्यमंत्री के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रमों से जुड़ी जानकारी का उदाहरण दिया।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जिन योजनाओं और परियोजनाओं का उद्घाटन या शिलान्यास करते हैं, उनका पूरा रिकॉर्ड सरकार और संबंधित विभागों के पास मौजूद रहता है। ऐसे में इस तरह की जानकारी एकत्र करने के लिए लंबा समय लगने का तर्क समझ से बाहर है।

जयराम ठाकुर ने दावा किया कि ऐसी सूचना एकत्र करना महज पांच मिनट का काम है। इसके बावजूद यदि विधानसभा में जानकारी नहीं दी जा रही है तो सरकार को इसकी वजह स्पष्ट करनी चाहिए।

सदन में नहीं मिलेगी जानकारी तो कहां जाएंगे विधायक

जयराम ठाकुर ने सवाल उठाया कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों को विधानसभा के भीतर भी जानकारी नहीं मिलेगी तो वे आखिर कहां से आधिकारिक सूचना प्राप्त करेंगे।

उन्होंने कहा कि विधानसभा सरकार से जवाब मांगने और जनहित के मुद्दों पर जानकारी प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण मंच है। विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर प्रश्न लगाते हैं।

ऐसे में विभागों की ओर से बार-बार सूचना एकत्र किए जाने की बात कहकर जवाब टालना उचित नहीं है।

प्रश्नकाल को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल

विपक्ष का कहना है कि प्रश्नकाल के माध्यम से विधायक सरकार की नीतियों, योजनाओं, खर्च, विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों से संबंधित जानकारी मांगते हैं।

सदन में दिए जाने वाले जवाब आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनते हैं। इसलिए प्रश्नों का समय पर उत्तर मिलना आवश्यक है।

यदि सवाल बार-बार स्थगित होते हैं या उनका जवाब नहीं मिलता है तो विधायक अपने क्षेत्र से जुड़े विषयों को प्रभावी तरीके से सदन के सामने नहीं रख पाएंगे।

विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

विपक्ष ने केवल सरकार ही नहीं बल्कि संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। सदस्यों का कहना था कि सरकारी विभागों के पास योजनाओं, कार्यक्रमों और सरकारी गतिविधियों से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है।

इसके बावजूद जानकारी जुटाने में लंबा समय लगना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

विपक्ष ने मांग की कि जिन प्रश्नों की जानकारी लंबित है, उनके जवाब जल्द सदन में उपलब्ध कराए जाएं।

मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष आमने-सामने

मानसून सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहले से ही तीखी बहस देखने को मिल रही है। अब लंबित प्रश्नों के जवाब का मुद्दा भी राजनीतिक टकराव का कारण बन गया है।

विपक्ष ने स्पष्ट किया कि वह विधायकों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के मुद्दे को गंभीरता से उठाता रहेगा।

वहीं इस विवाद के केंद्र में यह सवाल है कि जिन जानकारियों का रिकॉर्ड सरकारी विभागों के पास पहले से मौजूद है, उन्हें विधानसभा तक पहुंचाने में देरी क्यों हो रही है।

जवाबदेही को लेकर गरमाया सदन

बुधवार की कार्यवाही में स्थगित प्रश्नों का मुद्दा सरकार की जवाबदेही से जुड़ गया। सुधीर शर्मा की प्रश्न विलोप करने वाली टिप्पणी और जयराम ठाकुर के तीखे सवालों के बाद मामला और गरमा गया।

विपक्ष ने सरकार से मांग की कि विधानसभा में पूछे गए सवालों के जवाब तय समय पर दिए जाएं और सूचना एकत्र नहीं होने की स्थिति में उसकी स्पष्ट वजह भी बताई जाए।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने दोहराया कि विधानसभा ही वह मंच है जहां निर्वाचित प्रतिनिधि सरकार से आधिकारिक जानकारी मांग सकते हैं। इसलिए सदन में विधायकों को सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रभावी और समयबद्ध होनी चाहिए।

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