Himachal: तेजी से बढ़ रही है ये खतरनाक बीमारी, ये है वजह

Update: 2025-06-09 06:17 GMT
Himachal हिमाचल: हिमाचल प्रदेश में क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, जिसे 'साइलेंट महामारी' कहा जा रहा है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन ने इस बीमारी के बढ़ते खतरे को उजागर किया है, जो वाकई चिंताजनक है। यह अध्ययन हिमाचल के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC), शिमला में इलाज के लिए आए मरीजों पर आधारित है। चौंकाने वाली बात यह है कि शिमला जिला CKD का बड़ा हॉटस्पॉट बनकर उभरा है।
अध्ययन में शामिल कुल मरीजों में से करीब 39.9 फीसदी मरीज अकेले शिमला जिले से हैं। इसके बाद मंडी में 14.5 फीसदी, सोलन में 10 फीसदी और कुल्लू में 8.6 फीसदी मरीज मिले। वहीं, सबसे कम मरीज लाहौल-स्पीति जिले में 0.6 फीसदी मिले, जिसके पीछे की वजह कम आबादी और अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियां बताई जा रही हैं। एचपीयू के अंतःविषय अध्ययन विभाग के वरिष्ठ शोध अधिकारी रणधीर सिंह रांटा के नेतृत्व में आंचल शर्मा और सुनंदा संघेल ने मिलकर कुल 2,609 मरीजों पर यह महत्वपूर्ण अध्ययन किया। उन्होंने 2014 से 2023 तक क्रोनिक किडनी रोग के मरीजों के आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण किया।
इस विश्लेषण से पता चला कि सीकेडी के मामलों में लगातार वृद्धि हुई है, जो 2023 में कुल मामलों के 16.9 प्रतिशत के साथ अपने चरम पर पहुंच गई। सबसे कम प्रचलन 2017 में 6 प्रतिशत दर्ज किया गया।
डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानना ​​है कि सीकेडी के बढ़ते मामलों के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं - शुगर (मधुमेह), रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) और पेशाब में प्रोटीन का रिसाव। आईजीएमसी शिमला के नेफ्रोलॉजी विभाग की चिकित्सक डॉ. कामाक्षी सिंह ने बताया कि ये तीनों ही सीकेडी के मुख्य कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा किडनी फिल्टरेशन का बिगड़ना और किडनी के विभिन्न हिस्सों में बीमारियां भी इस गंभीर समस्या में योगदान दे रही हैं।
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