Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में अप्रैल के महीने में अचानक हुई बेमौसम बर्फबारी ने सेब के बागों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है। इस असामान्य मौसम घटना के कारण किसानों में चिंता और परेशानियाँ बढ़ गई हैं, क्योंकि यह समय सेब के फूल आने और फल बनने की अवधि के बीच आता है।
कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि बर्फबारी और अचानक ठंडे तापमान के कारण फूल झड़ने और छोटे सेबों को नुकसान होने की संभावना है। इससे आने वाले मौसम में फसल उत्पादन और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे किन्नौर, शिमला और मणिकरण में बर्फबारी ने बागानों को पूरी तरह प्रभावित किया है।
राज्य कृषि विभाग ने मौके पर जाकर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने कहा कि वे किसानों को मौसम के अनुकूल उपाय और राहत योजना के तहत मदद मुहैया कराएंगे। साथ ही, विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी बागबानी की फसलों की सुरक्षा के लिए अस्थायी ढ़काव और ताजा पानी की आपूर्ति जैसे उपाय करें।
किसानों का कहना है कि इस अप्रत्याशित बर्फबारी ने उन्हें आर्थिक नुकसान की चिंता में डाल दिया है। उन्होंने सरकार और संबंधित विभागों से जल्दी से जल्दी नुकसान की भरपाई और राहत योजनाओं की घोषणा करने की मांग की है।
मौसम विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि हिमाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अप्रैल-मई में बेमौसम बर्फबारी और ठंडे तूफानों का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे मौसम संबंधी अपडेट लगातार देखें और अपने बागों की सुरक्षा के लिए तुरंत कदम उठाएं।
विशेषज्ञों ने बताया कि यदि बर्फबारी के असर को कम करने के उपाय समय पर नहीं किए गए, तो सेब की मात्रा और गुणवत्ता दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे न केवल किसानों की आमदनी प्रभावित होगी, बल्कि राज्य की सेब निर्यात और व्यापार भी प्रभावित हो सकता है।
अंततः, हिमाचल प्रदेश में अप्रैल की बेमौसम बर्फबारी ने किसानों की चिंता और राहत कार्यों की आवश्यकता को बढ़ा दिया है। राज्य सरकार और कृषि विभाग अब फसल सुरक्षा, नुकसान आकलन और राहत उपाय पर तेजी से काम कर रहे हैं ताकि किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके और सेब उत्पादन को बचाया जा सके।