Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: दूर पांगी के जंगलों में देवदार के पेड़ों की अवैध कटाई की खबरें सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और पर्यावरण संगठनों ने सरकार और वन विभाग से तत्काल जांच की मांग की है। वन्य क्षेत्र में यह अवैध कटाई न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी और जल संरक्षण पर भी गंभीर असर डाल सकती है।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ तत्व वन विभाग की निगरानी के बावजूद देवदार के पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। इस अवैध गतिविधि से जंगल की जैव विविधता और वन्य जीवन को नुकसान पहुँचने का खतरा है। लोगों ने वन विभाग से कहा कि अवैध कटाई करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और नुकसान की भरपाई की जाए।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि देवदार की कटाई केवल लकड़ी की मांग को पूरा करने के लिए नहीं की जा रही है, बल्कि वन क्षेत्र की सुरक्षा और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए भी यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने अधिकारियों से सघन छानबीन और निगरानी बढ़ाने की अपील की है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मामले की तुरंत जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने यह भी कहा कि वन क्षेत्र में अवैध कटाई रोकने के लिए पेट्रोलिंग और निगरानी व्यवस्था को सख्त किया जाएगा।
स्थानीय पंचायतों और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही है। उनका कहना है कि जंगलों का संरक्षण सिर्फ वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समुदाय और नागरिकों का भी दायित्व है कि वे अवैध कटाई की घटनाओं पर नजर रखें।
विशेषज्ञों के अनुसार, देवदार के जंगल हिमालयी क्षेत्र में जलधारण और मिट्टी के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनकी कटाई से भूस्खलन, पानी की कमी और जैव विविधता का नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि अवैध कटाई पर रोक लगाना और जिम्मेदारों को सजा देना पर्यावरण संरक्षण के लिए अनिवार्य है।
कुल मिलाकर, दूर पांगी के जंगल में देवदार की अवैध कटाई की घटना ने वन विभाग और सरकार को अलर्ट किया है, जबकि स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मामले की तुरंत और निष्पक्ष जांच की मांग की है। यह कदम हिमाचल प्रदेश के वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक संदेश है।