Himachal Pradesh हिमाचल प्रदेश : पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने लंबित पेंशन मामलों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति ने आरोप लगाया है कि मंत्रिमंडल की सैद्धांतिक मंजूरी के बावजूद हजारों पेंशनरों को अब तक संशोधित पेंशन का लाभ नहीं मिल पाया है। इस स्थिति से पेंशनरों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

समिति के अनुसार, शिमला नगर निगम से जुड़े लगभग 800 पेंशनरों की फाइलें लंबे समय से आगे नहीं बढ़ाई गई हैं, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। समिति ने इस देरी को प्रशासनिक उदासीनता बताते हुए कड़ा एतराज जताया है और मांग की है कि इन सभी फाइलों को तुरंत शहरी विकास निदेशालय को भेजा जाए, ताकि मामलों का निपटारा किया जा सके।

पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार द्वारा पेंशन संबंधी कई निर्णय लिए जाने के बावजूद उनका जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। इससे हजारों सेवानिवृत्त कर्मचारी प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रहना पड़ रहा है।

समिति ने सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें भी रखी हैं। इनमें 6,564 निगम एवं बोर्ड कर्मचारियों को पेंशन योजना के दायरे में शामिल करना, 40 प्रतिशत वित्तीय लाभ से जुड़ी अधिसूचना तुरंत जारी करना और लंबित 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) का भुगतान तत्काल सुनिश्चित करना शामिल है।

पेंशनरों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में समय पर पेंशन और भत्तों का न मिलना उनके लिए गंभीर समस्या बन गया है। कई सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

समिति ने इस मुद्दे को लेकर नगर निगम शिमला के महापौर को भी एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें पेंशन संबंधी लंबित मामलों के शीघ्र समाधान की मांग की गई है। ज्ञापन में प्रशासन से अपील की गई है कि पेंशनरों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए।

प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि जल्द ही सरकार और संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि पेंशनरों के अधिकारों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

इस बीच प्रशासनिक स्तर पर भी यह मामला चर्चा में आ गया है। अधिकारियों का कहना है कि विभिन्न विभागों से जुड़े पेंशन मामलों की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से देरी हो रही है। हालांकि पेंशनरों का आरोप है कि यह देरी अनावश्यक और अस्वीकार्य है।

राज्य में पेंशन व्यवस्था को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार संघर्ष समिति के सख्त रुख से मामला और गंभीर हो गया है। पेंशनर संगठनों का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द स्पष्ट नीति बनाकर सभी लंबित मामलों का समाधान करना चाहिए।

फिलहाल पेंशनरों के विरोध और मांगों ने राज्य प्रशासन के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार का रुख क्या होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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