Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: कांगड़ा वैली रेलवे संघर्ष समिति ने पठानकोट रेलवे स्टेशन को शिफ्ट करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध जताया है। समिति ने इस कदम को क्षेत्रीय हितों के खिलाफ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। समिति का कहना है कि पठानकोट रेलवे स्टेशन न केवल एक महत्वपूर्ण यातायात केंद्र है, बल्कि यह कांगड़ा घाटी और आसपास के क्षेत्रों के लाखों यात्रियों के लिए जीवनरेखा के समान है। ऐसे में इसे स्थानांतरित करने का निर्णय आम जनता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।
पत्र में समिति ने आरोप लगाया है कि स्टेशन शिफ्टिंग का प्रस्ताव बिना स्थानीय लोगों से व्यापक चर्चा और उनकी सहमति के तैयार किया गया है। उनका कहना है कि इस तरह के फैसले क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। स्थानीय प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि स्टेशन को दूर स्थानांतरित किया गया तो यात्रियों को अतिरिक्त समय और खर्च का सामना करना पड़ेगा, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ेगा। समिति ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री से अनुरोध किया है कि इस मामले की समीक्षा की जाए और किसी भी अंतिम निर्णय से पहले स्थानीय हितधारकों की राय को प्राथमिकता दी जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े रेलवे ढांचे के स्थानांतरण से पहले व्यापक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव का अध्ययन आवश्यक होता है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो इसका असर क्षेत्रीय विकास और पर्यटन पर भी पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पठानकोट स्टेशन पहले से ही एक रणनीतिक और व्यस्त रेलवे जंक्शन है, जिसे बदलने की बजाय और अधिक विकसित किया जाना चाहिए। रेलवे अधिकारियों की ओर से फिलहाल इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह प्रस्ताव अभी प्रारंभिक चरण में है। कुल मिलाकर, कांगड़ा वैली रेलवे संघर्ष समिति द्वारा पठानकोट रेलवे स्टेशन के शिफ्टिंग प्रस्ताव का विरोध इस मुद्दे को एक बार फिर सुर्खियों में ले आया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है और स्थानीय हितों को कैसे संतुलित किया जाता है।