Himachal: स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विशेषज्ञ चिंतित

Update: 2026-05-11 12:40 GMT
Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के आदिवासी जिलों किन्नौर, लाहौल और स्पीति में क्लाउड वेदर रडार स्थापित करने की योजना में देरी ने स्थानीय प्रशासन और मौसम विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। यह रडार योजना मौसम के सटीक पूर्वानुमान और प्राकृतिक आपदाओं से समय पर चेतावनी देने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही थी।
स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि योजना को लागू करने में तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें सामने आ रही हैं, जिसके कारण आदिवासी क्षेत्रों में रडार स्थापना में देरी हो रही है। इससे इन इलाकों में बारिश, बर्फबारी और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक घटनाओं की समय पर चेतावनी देने में बाधा उत्पन्न हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किन्नौर, लाहौल और स्पीति में मौसम अचानक बदलता है और सटीक पूर्वानुमान न मिलने से स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ जाता है। इस रडार के माध्यम से न केवल मौसम की सटीक जानकारी मिलेगी, बल्कि कृषि, पर्यटन और सड़क यातायात में सुधार के लिए भी मदद मिलेगी।
स्थानीय प्रशासन ने कहा कि सरकार जल्द ही योजना को अंतिम रूप देने और रडार की स्थापना में तेजी लाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया कि आदिवासी इलाकों में मौसम चेतावनी प्रणाली जल्द ही काम शुरू कर देगी और इससे स्थानीय लोगों को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित रहने में मदद मिलेगी।
आदिवासी समुदाय के लोग भी योजना में देरी से नाराज हैं। उनका कहना है कि सटीक मौसम जानकारी न मिलने से फसल, पशुपालन और दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि योजना को प्राथमिकता दें और किसी भी तरह की देरी को रोकें।
सरकार और मौसम विभाग ने तकनीकी टीमों को निर्देश दिया है कि वे रडार स्थापना और संचालन की प्रक्रिया को तेज करें। उन्होंने कहा कि योजना पूरी होने के बाद किन्नौर, लाहौल और स्पीति के लोग मौसम की बदलती परिस्थितियों की पूर्व जानकारी समय पर प्राप्त कर पाएंगे और आवश्यक सावधानी बरत सकेंगे।
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