Himachal हाई कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने की डेडलाइन तय की

Update: 2026-05-28 07:40 GMT

Himachal हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने वन भूमि और जंगलों से अतिक्रमण हटाने को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि राज्य में वन क्षेत्रों पर किए गए सभी अवैध कब्ज़ों को निर्धारित समयसीमा के भीतर हटाया जाए और इसके लिए 31 दिसंबर की डेडलाइन तय की गई है। यह फैसला राज्य में तेजी से बढ़ रहे अतिक्रमण के मामलों को देखते हुए लिया गया है, जो पर्यावरण और वन संसाधनों के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।

कोर्ट ने कहा है कि वन भूमि किसी भी स्थिति में निजी उपयोग के लिए नहीं दी जा सकती और इसे सुरक्षित रखना राज्य की जिम्मेदारी है। कई स्थानों पर लंबे समय से लोग जंगलों की जमीन पर कब्जा कर खेती, निर्माण या अन्य गतिविधियां कर रहे थे, जिससे वन क्षेत्र घट रहा था और पर्यावरण संतुलन पर असर पड़ रहा था।

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और वन विभाग को निर्देश दिया है कि वे सभी अतिक्रमण की पहचान करें और समयबद्ध तरीके से उन्हें हटाने की प्रक्रिया पूरी करें। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि भविष्य में इस तरह के अवैध कब्ज़े दोबारा न हों। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी भागीदारी जरूरी है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा।

इस आदेश के बाद राज्य प्रशासन सक्रिय हो गया है और संबंधित विभागों ने कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। कई जिलों में सर्वे और रिकॉर्ड जांच का काम तेज कर दिया गया है ताकि अतिक्रमण की सटीक पहचान हो सके। कुल मिलाकर, हिमाचल हाई कोर्ट का यह फैसला पर्यावरण संरक्षण और वन भूमि की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो राज्य में कानून व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा को मजबूत करेगा।

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