Himachal कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने बुधवार को कहा कि हिमाचल प्रदेश चालू वित्त वर्ष के लिए एग्रीस्टैक परियोजना के तहत केंद्र सरकार से 400 करोड़ रुपये का पात्र बन गया है। 2025-26 में परियोजना के तहत राज्य को 140 करोड़ रुपये मिले थे।
मंत्री ने प्रगति की समीक्षा के लिए कृषि विभाग की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने, फसलों में विविधता लाने और कृषि उपज के विपणन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को योजनाओं का समय पर क्रियान्वयन और पात्र किसानों को लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।
बैठक में जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) की सहायता से कार्यान्वित की जा रही हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना चरण II की प्रगति की भी समीक्षा की गई। नियोजित 306 उप-परियोजनाओं में से 174 पूरी हो चुकी हैं, जिससे 4,462.16 हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो गई है। 1,323.80 हेक्टेयर में सब्जी की खेती को बढ़ावा दिया गया है। परियोजना के तहत 10 किसान उत्पादक संगठन और 238 स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। पात्र और अपात्र घटकों को कवर करते हुए 1,010.60 करोड़ रुपये के कुल वित्तीय प्रावधान के मुकाबले 348.26 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
मंत्री ने तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्ता प्रमाणन और विपणन पर जोर देते हुए हमीरपुर, पालमपुर, सोलन और मंडी में प्राकृतिक रूप से उगाई जाने वाली हल्दी को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को पारंपरिक फसलों को प्रोत्साहित करने और कृषि उपज के लिए विपणन प्रणालियों में सुधार करने का भी निर्देश दिया।
बैठक में बताया गया कि 50 विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने भारतीय रिमोट सेंसिंग संस्थान, देहरादून में रिमोट सेंसिंग और भौगोलिक सूचना प्रणाली में प्रशिक्षण प्राप्त किया है। मंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी आय और आजीविका में सुधार के लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर सिंचाई, फसल विविधीकरण और मजबूत विपणन नेटवर्क से जोड़ना आवश्यक है।
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