Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: बंजार उपमंडल की चनौन पंचायत के शलेरा गांव में 18 लाख रुपये की लागत से बनी गोशाला कभी उपयोग में नहीं आई और पिछले कई सालों से बंद पड़ी है। गोशाला के शेड बनने के बाद स्टाफ और चारे की व्यवस्था नहीं हो पाई। गोशालाओं को प्रति पशु 700 रुपये की सहायता दी जा रही है और पशुपालन विभाग जिले की 11 गोशालाओं को हर माह करीब 5 लाख रुपये की राशि देता है। हैरानी की बात यह है कि संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद गोशाला बंद पड़ी है।
तीन बार शिलान्यास के बाद भी नहीं बनी सड़क तलाड़ा और भलाण पंचायत के गांवों को जोड़ने वाली 7 किलोमीटर सड़क का शिलान्यास तीन बार हो चुका है, लेकिन यह सड़क पूरी नहीं हो पाई है। दिलचस्प बात यह है कि सड़क के दोनों छोर बनकर तैयार हो गए हैं, जबकि बीच के हिस्से का काम अभी भी बाकी है। ग्रामीणों ने खुद ही डीपीआर और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी की प्रक्रिया पूरी कर ली है। सड़क के लिए कई साल पहले निजी जमीन भी दान में दी गई थी, लेकिन सड़क का लाभ अभी तक नहीं मिल पाया है। सड़क निर्माण कार्य लंबित रहने से 12 से अधिक गांवों के लोग परेशान हैं।