Himachal Pradesh.हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने वित्तीय बोझ को कम करने के प्रयास के तहत केंद्रीय सरकार से राज्य के IAS और IFS कैडर में कटौती करने की मांग की है। राज्य ने इस कदम को अपने बजट पर दबाव कम करने और प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक बताया है।
राज्य प्रशासन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे छोटे राज्यों के लिए IAS और IFS कैडर की उच्च संख्या से वित्तीय बोझ बढ़ता है। अधिकारी वेतन, भत्ते और प्रशासनिक खर्च राज्य के सीमित संसाधनों पर भारी पड़ते हैं। इसलिए राज्य सरकार ने केंद्रीय स्तर पर कटौती के लिए औपचारिक अनुरोध भेजा है।
वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार ने कैडर घटाने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे सक्षम और चुस्त प्रशासन को बनाए रखना संभव होगा, जबकि राज्य का वित्तीय दबाव कम रहेगा। अधिकारी ने यह भी बताया कि राज्य के कई विभागों में आईएएस और आईएफएस अधिकारियों की संख्या अपेक्षित से अधिक है, जो संसाधनों के कुशल उपयोग में बाधा डालती है।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने बयान में कहा, “हिमाचल प्रदेश अपने संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करना चाहता है। IAS और IFS कैडर में कटौती से राज्य के वित्तीय संतुलन में सुधार होगा और आवश्यक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की सुविधा मिलेगी।”
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे राज्यों के लिए अधिकारियों की अधिक संख्या प्रशासनिक खर्चों में वृद्धि और संसाधनों के अप्रभावी उपयोग का कारण बन सकती है। हिमाचल प्रदेश का यह कदम देश के अन्य छोटे राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जहां वित्तीय दबाव प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित कर रहा है।
राज्य सरकार ने केंद्रीय स्तर पर यह स्पष्ट किया है कि कटौती का उद्देश्य केवल खर्च में कमी और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना है, न कि किसी विभाग की कार्यक्षमता पर असर डालना। अधिकारी आश्वस्त कर रहे हैं कि आवश्यक क्षेत्रीय और संवेदनशील विभागों में पर्याप्त संख्या में अधिकारी बनाए रखे जाएंगे।
इसके अलावा, राज्य ने यह भी सुझाव दिया है कि कैडर में समायोजन के दौरान अनुभवी अधिकारियों का अनुभव संरक्षित रखा जाए, ताकि प्रशासनिक निर्णयों की गुणवत्ता बनी रहे। राज्य के वित्तीय बोझ को कम करने के प्रयास के तहत IAS और IFS कैडर की कटौती एक गंभीर और रणनीतिक कदम माना जा रहा है।