सिरमौर: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के नौहराधार और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में नई सौगात मिली है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को शिमला से वर्चुअल माध्यम से नौहराधार में नवनिर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानी सीएचसी भवन का लोकार्पण किया। श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र में करीब 6.92 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह भवन दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे आसपास की 20 ग्राम पंचायतों के 47 गांवों के लगभग 50 हजार लोगों को लाभ मिलेगा। 
नए स्वास्थ्य केंद्र में छह बिस्तरों की क्षमता उपलब्ध कराई गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यहां दो चिकित्सा अधिकारियों और एक स्टाफ नर्स की नियुक्ति की गई है, ताकि मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू रूप से मिल सकें। भवन के साथ चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता स्थानीय लोगों की उपचार संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। सरकार का कहना है कि केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को अपने घरों के नजदीक समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाएगा। 
पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य संस्थानों की नजदीकी लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है। दूर स्थित अस्पताल तक पहुंचने में यात्रा, वाहन और साथ जाने वाले परिजन की व्यवस्था करनी पड़ती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर उपचार की सुविधा मजबूत होने से मरीजों और उनके परिवारों की परेशानी कम होने की उम्मीद है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, मरीज को मिलने वाला उपचार उसकी बीमारी, केंद्र में उपलब्ध सेवाओं और चिकित्सक के आकलन पर निर्भर करेगा।
लोकार्पण के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संस्थानों में सुविधाएं और कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार का प्रयास है कि लोगों को बेहतर उपचार के लिए प्रदेश से बाहर जाने की जरूरत कम पड़े। इसके लिए अलग-अलग स्तर के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। 
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि सरकार 31 मार्च 2027 तक स्वास्थ्य संस्थानों में स्टाफ की उपलब्धता 70 प्रतिशत से अधिक करने के लिए प्रयासरत है। यह सरकार का निर्धारित लक्ष्य है। उन्होंने चिकित्सा महाविद्यालयों, क्षेत्रीय अस्पतालों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था सुदृढ़ करने की बात कही। ग्रामीण आबादी तक बेहतर चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने के लिए इन संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई। 
नौहराधार में नए भवन की शुरुआत से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा उपलब्ध हुआ है। किसी भी स्वास्थ्य संस्थान की उपयोगिता भवन के साथ नियमित चिकित्सकीय सेवाओं, दवाओं, आवश्यक संसाधनों और कर्मचारियों की उपलब्धता से तय होती है। ऐसे में आने वाले समय में केंद्र की व्यवस्था का निरंतर संचालन ग्रामीणों के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। स्थानीय स्तर पर मरीजों की जरूरतों के अनुरूप सेवाएं मिलने से इस परियोजना का लाभ अधिक लोगों तक पहुंच सकेगा।
कार्यक्रम में स्थानीय विधायक एवं हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विनय कुमार ने नए सीएचसी भवन के लोकार्पण के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भी आसपास के गांवों के लोगों को घर के नजदीक स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की बात कही। उद्घाटन कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. कर्नल धनीराम शांडिल और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह सहित अधिकारी शामिल रहे। नौहराधार में जिला प्रशासन तथा स्थानीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। 
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ शिक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर भी बात की। उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला संगड़ाह को सीबीएसई स्कूल बनाने की घोषणा की। इसके अलावा क्षेत्र में प्रतिदिन पांच हजार लीटर क्षमता का मिल्क चिलिंग प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन दिया। चिलिंग प्लांट संबंधी बात फिलहाल प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन है। इसे स्वीकृत परियोजना या निर्माण शुरू होने की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 
नौहराधार सीएचसी का नया भवन ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे में एक महत्वपूर्ण जोड़ है। मुख्यमंत्री ने इसके जरिए दुर्गम क्षेत्रों के लोगों तक समय पर उपचार पहुंचाने की उम्मीद जताई है। अब केंद्र में तैनात चिकित्सा कर्मियों और उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से सेवाओं का सुचारू संचालन क्षेत्रवासियों के लिए अहम होगा। नजदीक उपचार मिलने से जहां मरीजों को शुरुआती चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करने में सुविधा हो सकती है, वहीं परिवारों पर दूर की यात्रा का बोझ घटने की भी उम्मीद है। परियोजना की वास्तविक उपयोगिता नियमित और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं के रूप में सामने आएगी।
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