हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट बिजली मीटरों पर विवाद के असामान्य रूप से बढ़ने पर, बिलासपुर जिले के कपाहड़ा ग्राम पंचायत के प्रधान विनय शर्मा ने हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड (एचपीएसईबीएल) को एक नोटिस भेजा है, जिसमें स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार करने पर उनका बिजली कनेक्शन काट दिए जाने के बाद उनकी जमीन से बिजली के खंभे, तार और अन्य बुनियादी ढांचे को हटाने के लिए कहा गया है। अपनी बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग करने के बजाय, शर्मा ने मांग की है कि विभाग 24 घंटे के भीतर अपना बुनियादी ढांचा हटा दे और उस अवधि के लिए उन्हें मुआवजा दे, जिस दौरान उसने उनकी जमीन का उपयोग किया है।
"जब बिजली बोर्ड ने एकतरफा तौर पर मुझे अपनी सेवाएं बंद करने का फैसला किया है, तो मुझे बोर्ड को अपनी जमीन का उपयोग करने की अनुमति क्यों देनी चाहिए?" शर्मा ने कहा, उन्होंने विभाग को वही 24 घंटे की समय सीमा दी थी जो उसने उनकी बिजली आपूर्ति काटने से पहले दी थी। शर्मा ने यह भी घोषणा की कि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में उनकी पंचायत सोमवार को शिमला-धर्मशाला राजमार्ग को अवरुद्ध कर देगी। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित नाकेबंदी में अन्य पंचायतों के निवासी भी शामिल होंगे.
यह टकराव कपाहड़ा ग्राम पंचायत के स्मार्ट मीटर के विरोध से उपजा है। ग्राम सभा ने उनकी स्थापना के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया था और बाद में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की थी। उपभोक्ताओं की सहमति के बिना मीटर स्थापित करने की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए, शर्मा ने कहा कि निवासियों को बढ़े हुए बिजली बिलों का डर है क्योंकि उपकरणों पर नियंत्रण उन्हें प्रबंधित करने वाली निजी कंपनी के पास रहेगा। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि अगर स्मार्ट मीटर, जिसकी कीमत कथित तौर पर लगभग ₹10,000 है, क्षतिग्रस्त हो जाता है या प्रतिस्थापन की आवश्यकता होती है, तो गरीब परिवारों पर वित्तीय बोझ पड़ेगा।
शर्मा ने आरोप लगाया कि पंचायत के प्रस्ताव और लंबित अदालती कार्यवाही के बारे में सूचित किए जाने के बावजूद बिजली बोर्ड ने उनका कनेक्शन काट दिया। उनके अनुसार, विभाग ने 14 अक्टूबर को नोटिस जारी किया और अगले दिन आपूर्ति काट दी, जब वह घर पर नहीं थे। यह दावा करते हुए कि उन्होंने नियमित रूप से अपने बिजली बिल का भुगतान किया है, शर्मा ने कनेक्शन काटने की वैधता पर सवाल उठाया और कहा कि कार्रवाई अनुचित थी।
हालांकि, स्थानीय उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) ने विभाग की कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि उपभोक्ता को मौजूदा मीटर के स्थान पर स्मार्ट मीटर लगाने के प्रस्ताव के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसका पालन करने से इनकार कर दिया था। एसडीओ ने कहा, "बिजली मीटर बोर्ड की संपत्ति है और विभाग इसे स्मार्ट मीटर से बदल रहा है। अगर कोई स्मार्ट मीटर लगाने से इनकार करता है तो उसका कनेक्शन काटने का प्रावधान है।" प्रस्तावित राजमार्ग नाकाबंदी विवाद को बढ़ा सकती है, जिससे स्मार्ट मीटर स्थापना, उपभोक्ता चिंताओं और बिजली बोर्ड की प्रवर्तन शक्तियों के मुद्दे पर अधिक ध्यान दिया जा सकता है।