शिमला। हिमाचल प्रदेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) कैडर की संख्या घटाने के संभावित प्रस्ताव को लेकर प्रशासनिक हलकों में विवाद बढ़ता जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से कैडर में कमी किए जाने की संभावित पहल के विरोध में ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ स्टेट सिविल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस एसोसिएशंस (AIF) खुलकर सामने आ गया है। फेडरेशन ने इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है।

फेडरेशन के अध्यक्ष गौरव बजाड ने केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की सचिव रचना शाह को पत्र लिखकर मामले पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया है। संगठन ने कहा है कि यदि हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से IAS कैडर की संख्या कम करने का कोई प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है तो उसे तत्काल खारिज किया जाना चाहिए।

केंद्र से प्रस्ताव खारिज करने की मांग

फेडरेशन ने अपने पत्र में कहा है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में प्रशासनिक जिम्मेदारियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में IAS कैडर को कम करने के बजाय राज्य की मौजूदा प्रशासनिक जरूरतों का आकलन किया जाना चाहिए।

संगठन का कहना है कि यदि राज्य सरकार की ओर से कैडर घटाने का प्रस्ताव भेजा गया है तो केंद्र को उस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। फेडरेशन ने प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकताओं को देखते हुए कैडर की पर्याप्त संख्या बनाए रखने पर जोर दिया है।

फेडरेशन के महासचिव डॉ. रवि तिरलापुर ने भी केंद्र से इस संभावित प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की है।

IAS कैडर नियमों का दिया हवाला

फेडरेशन ने अपने विरोध के समर्थन में IAS कैडर नियम, 1954 का हवाला दिया है। संगठन के अनुसार, राज्यों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ कैडर की जरूरतों का समय-समय पर आकलन किया जाता है।

फेडरेशन का तर्क है कि नए विभागों के गठन, जिलों की संख्या में बदलाव, सरकारी योजनाओं के विस्तार और प्रशासनिक कार्यों में वृद्धि के कारण सामान्य तौर पर कैडर की संख्या बढ़ाने की जरूरत सामने आती है।

ऐसे में हिमाचल प्रदेश में IAS कैडर की संख्या घटाने का संभावित प्रस्ताव संगठन के लिए चिंता का विषय है। फेडरेशन ने सवाल उठाया है कि जब प्रशासनिक जिम्मेदारियां कम नहीं हो रही हैं तो कैडर को कम करने की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है।

बढ़ती प्रशासनिक जरूरतों का हवाला

हिमाचल प्रदेश भौगोलिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण राज्य है। पर्वतीय इलाकों में प्रशासनिक सेवाओं को प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए अधिकारियों की पर्याप्त उपलब्धता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

फेडरेशन का कहना है कि राज्य में विकास योजनाओं, आपदा प्रबंधन, ग्रामीण विकास, पर्यटन, बुनियादी ढांचे और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ी हैं। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों की उपलब्धता को कम करना व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

संगठन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि कैडर की संख्या तय करते समय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखा जाए।

प्रस्ताव को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग

फेडरेशन ने केंद्र से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि क्या हिमाचल प्रदेश सरकार ने वास्तव में IAS कैडर को कम करने संबंधी कोई औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। संगठन का कहना है कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव केंद्र के पास आया है तो उस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।

फेडरेशन के पत्र के बाद अब इस मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विवाद का केंद्र अभी संभावित प्रस्ताव है और इसकी अंतिम स्थिति केंद्र की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

प्रशासनिक अधिकारियों के संगठन की सक्रियता

AIF की ओर से इस मुद्दे पर केंद्र को पत्र लिखे जाने से मामला केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहा है। अब यह केंद्र और राज्य के बीच प्रशासनिक समन्वय का विषय भी बन गया है।

फेडरेशन ने अपने रुख में स्पष्ट किया है कि वह राज्यों में प्रशासनिक सेवाओं की पर्याप्त क्षमता बनाए रखने के पक्ष में है। संगठन के मुताबिक, कैडर निर्धारण केवल पदों की संख्या का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध शासन की गुणवत्ता और प्रशासनिक कार्यक्षमता से है।

कैडर कम होने से क्या असर पड़ सकता है?

फेडरेशन की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि IAS अधिकारियों की संख्या कम होने पर राज्य में वरिष्ठ प्रशासनिक जिम्मेदारियों का वितरण प्रभावित हो सकता है। इससे अधिकारियों पर काम का दबाव बढ़ने की संभावना है।

इसके अलावा सरकार की विभिन्न योजनाओं की निगरानी, जिलों और विभागों के बीच समन्वय तथा आपदा जैसी परिस्थितियों में प्रशासनिक नेतृत्व की जरूरत को भी ध्यान में रखना होगा।

हालांकि कैडर की वास्तविक जरूरत का निर्धारण राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों, प्रशासनिक कार्यभार और निर्धारित नियमों के आधार पर किया जाता है। इसलिए अंतिम निर्णय से पहले इन सभी पहलुओं का अध्ययन महत्वपूर्ण होगा।

केंद्र के रुख पर टिकी नजर

हिमाचल में IAS कैडर को लेकर उठे विवाद के बीच अब सभी की नजर केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के रुख पर है। फेडरेशन ने केंद्र से स्पष्ट रूप से संभावित प्रस्ताव को खारिज करने की मांग की है।

यदि हिमाचल सरकार की ओर से वास्तव में कैडर घटाने का प्रस्ताव भेजा गया है तो केंद्र स्तर पर इसकी समीक्षा के बाद आगे की स्थिति सामने आएगी। वहीं, यदि कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं भेजा गया है तो सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने से विवाद खत्म हो सकता है।

फिलहाल हिमाचल प्रदेश में IAS कैडर की संभावित कमी को लेकर प्रशासनिक बहस तेज हो गई है। AIF ने केंद्र से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि राज्य की बढ़ती प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए कैडर में कमी करने के बजाय पर्याप्त संख्या सुनिश्चित की जानी चाहिए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र और हिमाचल सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं।

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