शिमला : 1 नवंबर। हिमाचल प्रदेश में 'वोट चोरी' और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भारतीय जनता पार्टी तथा कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल और पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने रविवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने कांग्रेस के चुनावी अनियमितताओं संबंधी आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार को चुनावी व्यवस्था पर आरोप लगाने के बजाय जनता से किए गए वादों और अपने चार वर्षों के कामकाज का हिसाब देना चाहिए।रविवार को शिमला में भाजपा की ओर से 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान के तहत पदयात्रा आयोजित की गई। इसमें असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, सांसद अनुराग सिंह ठाकुर सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। पदयात्रा के दौरान भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सरकार की नीतियों, चुनावी वादों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर कांग्रेस के रुख की आलोचना की।
राजीव बिंदल ने कहा कि कांग्रेस दिल्ली में वोट चोरी के आरोप लगाकर हिमाचल प्रदेश की जनता से जुड़े मुद्दों को पीछे नहीं कर सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में सड़कें खराब स्थिति में हैं, अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है, स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं और कई क्षेत्रों में लोगों को पेयजल की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।बिंदल ने सवाल उठाया कि इन समस्याओं का समाधान करने के बजाय कांग्रेस सरकार के नेता दिल्ली में प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता सरकार से उसके कामकाज की जवाबदेही चाहती है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के अनुसार, सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि चुनाव के समय किए गए वादों में से कितने पूरे हुए और कितने अभी लंबित हैं।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की कांग्रेस की चुनावी घोषणा का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये देने का वादा किया था। सरकार को बताना चाहिए कि कितनी महिलाओं को इस योजना के तहत सहायता मिल रही है और कितनी पात्र महिलाएं अब भी लाभ की प्रतीक्षा कर रही हैं।
उन्होंने युवाओं के रोजगार का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार रोजगार उपलब्ध कराने के अपने वादों पर अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई है। बिंदल ने कहा कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को चुनावी घोषणाओं के क्रियान्वयन की जानकारी मिलनी चाहिए।वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने चुनाव आयोग और मतदान प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस के रुख को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि जब पार्टी चुनाव जीतती है तो उसे चुनावी प्रणाली पर भरोसा रहता है, लेकिन हार मिलने पर वही पार्टी ईवीएम और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है।जयराम ठाकुर पहले भी कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा करने का आरोप लगा चुके हैं। उनका कहना है कि चुनावी अनियमितताओं से संबंधित आरोपों की जांच निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से होनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस से अपने आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण सामने रखने की मांग की है।
रविवार की पदयात्रा में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी कांग्रेस सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस जिस चुनावी व्यवस्था के माध्यम से सत्ता में आई, उसी व्यवस्था को लेकर अब सवाल उठा रही है।सरमा ने मुख्यमंत्री सुक्खू से पूछा कि यदि कांग्रेस को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों पर आपत्ति है तो उसे अपने रुख को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने रोजगार और महिलाओं को आर्थिक सहायता देने संबंधी चुनावी वादों का भी उल्लेख किया। सरमा ने भाजपा कार्यकर्ताओं से प्रदेश सरकार के कामकाज और चुनावी घोषणाओं से जुड़े सवाल जनता के बीच उठाने का आह्वान किया।मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भी दोनों दलों में मतभेद बने हुए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है। उनका आरोप है कि कांग्रेस एसआईआर के मुद्दे पर लोगों में भ्रम पैदा कर रही है।
दूसरी ओर, कांग्रेस ने मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटाए जाने की आशंका जताई है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची की जांच के दौरान किसी भी योग्य नागरिक का मतदान अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए। हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने भी भाजपा पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है।कांग्रेस का तर्क है कि चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों को लेकर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। पार्टी का कहना है कि चुनावी व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों को राजनीतिक आरोप बताकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए।मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी कांग्रेस के रुख का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार लंबे संघर्ष के बाद मिला है और इसकी रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। सुक्खू के अनुसार, दिल्ली के रामलीला मैदान में INDIA गठबंधन की रैली का उद्देश्य लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को उठाना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को है। कांग्रेस ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के स्थान पर मतपत्रों के इस्तेमाल और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग भी उठाई है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने भी विपक्ष की रैली को चुनावी सुधारों से जुड़ा कार्यक्रम बताया।
भाजपा ने कांग्रेस के इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार को चुनावी मुद्दों पर प्रदर्शन करने के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश की जनता की समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों की प्रगति पर भी जवाब देना चाहिए।हिमाचल प्रदेश में भाजपा का 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान अलग-अलग संसदीय क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है। धर्मशाला में 30 अक्टूबर को कार्यक्रम के बाद रविवार को शिमला में पदयात्रा निकाली गई। पार्टी ने 4 नवंबर को मंडी और हमीरपुर में भी कार्यक्रम निर्धारित किए हैं।राज्य में अगले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। भाजपा कांग्रेस सरकार के चुनावी वादों और प्रशासनिक प्रदर्शन को मुद्दा बना रही है, जबकि कांग्रेस मतदाता अधिकारों, चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर जोर दे रही है।हालांकि, वोट चोरी के आरोपों को लेकर दोनों दलों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है, लेकिन किसी विशिष्ट चुनाव में अनियमितता हुई है या नहीं, इसका निष्कर्ष संबंधित प्रमाणों और सक्षम संस्थाओं की जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।फिलहाल राजीव बिंदल और जयराम ठाकुर के बयानों ने हिमाचल प्रदेश में चुनावी प्रक्रिया और राज्य सरकार की जवाबदेही को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।