शिमला। हिमाचल प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस के भीतर गुटबाजी के भारतीय जनता पार्टी के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के सभी नेता पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की विरासत और उनके योगदान का सम्मान करते हैं। उनकी प्रतिमा के अनावरण जैसे सम्मानजनक कार्यक्रम को राजनीतिक गुटबाजी से जोड़ना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर पलटवार करते हुए दावा किया कि विपक्षी पार्टी खुद पांच अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है।
गुटबाजी के आरोपों पर मुख्यमंत्री का जवाब
शिमला के संजौली हेलीपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में गुटबाजी होने की बात पूरी तरह गलत है और भाजपा बेवजह इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रही है।मुख्यमंत्री ने कहा, "गुटबाजी क्यों होगी? यह एक गलत बयान है। भाजपा खुद पांच गुटों में बंटी हुई है।"उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता एकजुट हैं और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के योगदान को सम्मान देने के लिए साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी सम्मान समारोह में नेताओं की उपस्थिति या अनुपस्थिति को पार्टी के आंतरिक मतभेदों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
वीरभद्र सिंह की प्रतिमा को लेकर शुरू हुआ विवाद
दरअसल, शिमला जिले के सराहन में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम के बाद हिमाचल प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था।इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार की अनुपस्थिति को लेकर भाजपा ने सवाल उठाए थे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल ने आरोप लगाया था कि दोनों प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति कांग्रेस के भीतर आपसी मतभेदों को दर्शाती है।हालांकि, कांग्रेस की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है। प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, मंत्री विक्रमादित्य सिंह और कांग्रेस के अन्य नेता शामिल हुए थे।
वीरभद्र सिंह की विरासत का सम्मान करती है कांग्रेस
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। राज्य के विकास में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।उन्होंने कहा कि सराहन में उनकी प्रतिमा का अनावरण उनके राजनीतिक जीवन और प्रदेश के प्रति सेवाओं को सम्मान देने का अवसर था।सुक्खू ने कहा कि वीरभद्र सिंह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे और उनके योगदान को किसी एक समूह तक सीमित नहीं किया जा सकता। ऐसे कार्यक्रमों को राजनीतिक विवाद का विषय बनाने के बजाय सम्मान और स्मरण के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
भाजपा ने भी कांग्रेस नेतृत्व पर उठाए सवाल
हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने इससे पहले दावा किया था कि वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का शामिल नहीं होना पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों का संकेत है।भाजपा नेताओं ने कांग्रेस सरकार के कामकाज और नेतृत्व के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राजनीतिक समूहों के कारण सरकार की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।वहीं, मुख्यमंत्री सुक्खू ने इन आरोपों को अस्वीकार करते हुए कहा कि विपक्ष कांग्रेस के भीतर मतभेद होने का राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रहा है।
कांग्रेस छोड़ने वाले छह पूर्व विधायकों पर भी बोले सुक्खू
मुख्यमंत्री से उन छह पूर्व कांग्रेस विधायकों को लेकर भी सवाल किया गया, जिन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल करने की इच्छुक नहीं है।सुक्खू ने कहा कि जब पार्टी उन्हें वापस नहीं लेना चाहती, तो इस विषय पर चर्चा करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अन्य नेता पार्टी छोड़ना चाहता है, तो वह भी जा सकता है।उनके इस बयान को कांग्रेस छोड़कर जाने वाले नेताओं के संबंध में पार्टी के रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री सुक्खू ने चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि चुनावों को लेकर लोगों के मन में उठने वाले संदेह दूर होना जरूरी है।मुख्यमंत्री के अनुसार, बैलेट पेपर से चुनाव कराना ऐसे संदेहों को दूर करने का एक तरीका हो सकता है। उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास बना रहना लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।इसके अलावा मुख्यमंत्री ने नवंबर में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की संभावना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दिसंबर में पर्यटन सीजन के दौरान शिमला, धर्मशाला और मनाली जैसे क्षेत्रों में यातायात का दबाव बढ़ जाता है, इसलिए नवंबर में सत्र आयोजित करने पर विचार किया जा सकता है।
हिमाचल की राजनीति में बयानबाजी तेज
वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच शुरू हुई बयानबाजी अब पार्टी की एकजुटता और नेतृत्व से जुड़े सवालों तक पहुंच गई है।मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का कहना है कि कांग्रेस में किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं है, जबकि भाजपा नेताओं का दावा है कि प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति पार्टी के भीतर मतभेदों का संकेत है।फिलहाल दोनों राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष पर कायम हैं और इस मुद्दे को लेकर प्रदेश में सियासी चर्चा जारी है।