शिमला में अनसेफ इमारतों को लेकर प्रशासन अलर्ट, बारिश के बीच बड़ा हादसा होने का डर
चेतावनी के बावजूद खाली नहीं हुए शिमला के असुरक्षित भवन, बरसात में बढ़ी लोगों की चिंता
HIMACHAL-PRADESH: राजधानी शिमला में मानसून के बीच एक गंभीर स्थिति सामने आई है। प्रशासन द्वारा 150 से अधिक भवनों को असुरक्षित (Unsafe) घोषित किए जाने के बावजूद कई परिवार अब भी इन इमारतों में रहने को मजबूर हैं। लगातार हो रही बारिश, भूस्खलन और जमीन धंसने की घटनाओं के बीच इन भवनों में रहना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा माना जा रहा है।
नगर प्रशासन और विशेषज्ञों ने लोगों से इन भवनों को तत्काल खाली करने की अपील की है, लेकिन वैकल्पिक आवास की कमी और आर्थिक मजबूरियों के कारण कई निवासी अपने घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। इससे बरसात के मौसम में जान-माल के नुकसान का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
150 से अधिक भवन घोषित किए गए असुरक्षित
शिमला नगर क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर स्थित करीब 150 भवनों को तकनीकी निरीक्षण के बाद असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है। इन इमारतों में—
दीवारों में बड़ी दरारें,
नींव कमजोर होना,
जमीन का धंसना,
पहाड़ी कटाव,
भूस्खलन का खतरा,
जैसी गंभीर समस्याएं पाई गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश होने पर इन भवनों की स्थिति और खराब हो सकती है।
चेतावनी के बावजूद क्यों नहीं खाली हो रहे मकान?
प्रशासन द्वारा नोटिस जारी करने के बाद भी कई परिवार इन भवनों में रह रहे हैं। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं—
वैकल्पिक आवास की कमी।
आर्थिक स्थिति कमजोर होना।
किराये के मकान का खर्च उठाने में कठिनाई।
वर्षों पुराने घरों से भावनात्मक जुड़ाव।
यह उम्मीद कि भवन तत्काल नहीं गिरेगा।
इन कारणों से लोग जोखिम उठाकर भी वहीं रहने को मजबूर हैं।
मानसून में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
शिमला पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है, जहां मानसून के दौरान भारी वर्षा से मिट्टी ढीली हो जाती है। इसके कारण—
भूस्खलन (Landslide),
पहाड़ियों का कटाव,
रिटेनिंग वॉल का गिरना,
भवनों की नींव कमजोर होना,
सड़क धंसना,
जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
यदि पहले से क्षतिग्रस्त भवनों में लोग रह रहे हों, तो दुर्घटना की संभावना और अधिक बढ़ जाती है।
प्रशासन की अपील
प्रशासन ने असुरक्षित घोषित भवनों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
साथ ही संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि—
भवनों की नियमित निगरानी की जाए।
संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया जाए।
आपदा की स्थिति में त्वरित राहत और बचाव दल तैयार रहें।
लोगों को समय-समय पर चेतावनी जारी की जाए।
विशेषज्ञों की सलाह
भवन विशेषज्ञों और आपदा प्रबंधन अधिकारियों का कहना है कि जिन इमारतों को तकनीकी जांच के बाद असुरक्षित घोषित किया गया है, उनमें रहना गंभीर जोखिम हो सकता है।
वे सलाह देते हैं कि—
भवन में नई दरार दिखने पर तुरंत प्रशासन को सूचना दें।
भारी बारिश के दौरान सतर्क रहें।
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें।
आपातकालीन संपर्क नंबर अपने पास रखें।
प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
हिमाचल में बढ़ रही प्राकृतिक आपदाएं
पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश, बादल फटना और भूस्खलन जैसी घटनाओं में वृद्धि देखी गई है। विशेष रूप से शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और सोलन जैसे जिलों में मानसून के दौरान कई बार सड़कें, मकान और अन्य ढांचागत संरचनाएं प्रभावित होती रही हैं।
विशेषज्ञ इसका एक कारण अनियोजित निर्माण, पहाड़ियों की कटाई और बदलते जलवायु पैटर्न को भी मानते हैं।
क्या करें नागरिक?
मानसून के दौरान लोगों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए—
असुरक्षित भवनों में रहने से बचें।
भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा न करें।
ढलान वाले क्षेत्रों में सतर्क रहें।
स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान दें।
आपदा की स्थिति में तुरंत राहत एजेंसियों से संपर्क करें।