चौकी इंचार्ज के निजी रिवाल्वर से चली गोली चौकीदार के पेट में लगी, हालत गंभीर
पडरौना। कोतवाली परिसर में शनिवार दोपहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कस्बा पुलिस चौकी इंचार्ज वीरेंद्र बहादुर सिंह के निजी रिवाल्वर से अचानक गोली चल गई। गोली ड्यूटी पर तैनात एक चौकीदार के पेट में जा लगी। गोली लगते ही चौकीदार लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़े। घटना के बाद पुलिसकर्मियों ने तत्काल उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया।
घटना शनिवार दोपहर करीब दो बजे की बताई जा रही है। उस समय पडरौना कोतवाली परिसर में पुलिसकर्मी और अन्य कर्मचारी अपनी नियमित ड्यूटी पर मौजूद थे। इसी दौरान अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी। तेज आवाज से परिसर में मौजूद लोग सकते में आ गए। कुछ ही देर में पता चला कि गोली ड्यूटी पर तैनात चौकीदार को लगी है।
चौकीदार को पेट में गोली लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तत्काल उन्हें संभाला और इलाज के लिए अस्पताल लेकर गए। प्राथमिक उपचार के दौरान उनकी हालत गंभीर पाए जाने पर चिकित्सकों ने बेहतर उपचार के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। घटना के बाद कोतवाली परिसर में काफी देर तक हलचल की स्थिति बनी रही।
प्रारंभिक तौर पर बताया जा रहा है कि कस्बा पुलिस चौकी इंचार्ज वीरेंद्र बहादुर सिंह अपने निजी रिवाल्वर की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान अचानक रिवाल्वर से गोली चल गई, जो पास में मौजूद चौकीदार के पेट में जा लगी। हालांकि गोली किन परिस्थितियों में चली और घटना के समय रिवाल्वर में कारतूस क्यों मौजूद था, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
इस घटना के बाद कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि चौकी इंचार्ज अपना निजी रिवाल्वर लेकर कोतवाली परिसर में क्यों आए थे। दूसरा सवाल यह है कि यदि वह हथियार की सफाई कर रहे थे तो उससे पहले रिवाल्वर को पूरी तरह खाली और सुरक्षित क्यों नहीं किया गया। हथियार संभालते समय सुरक्षा संबंधी सावधानियों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
आमतौर पर किसी भी हथियार की सफाई या रखरखाव से पहले उसमें मौजूद कारतूस निकालना और यह सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि हथियार पूरी तरह खाली है। ऐसे में यदि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सफाई के दौरान ही गोली चली है तो यह पता लगाना जरूरी होगा कि सुरक्षा प्रक्रिया में चूक कहां हुई।
घटना पुलिस परिसर के भीतर होने और गोली पुलिस चौकी इंचार्ज के निजी हथियार से चलने की बात सामने आने के कारण मामला संवेदनशील हो गया है। पुलिस विभाग के अधिकारियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि यह महज दुर्घटना थी या इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई। इसके लिए घटनास्थल की परिस्थितियों और हथियार से संबंधित तथ्यों की जांच आवश्यक होगी।
प्रत्यक्ष परिस्थितियों के अनुसार गोली चलने के तत्काल बाद परिसर में मौजूद पुलिसकर्मी घायल चौकीदार की मदद के लिए दौड़े। गंभीर रूप से घायल होने के कारण प्राथमिकता उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की रही। अस्पताल में चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया, लेकिन पेट में गोली लगने के कारण उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान भेजने का निर्णय लिया गया।
चौकीदार के गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर होने के बाद उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस विभाग में भी हलचल बढ़ गई। अब पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच और संबंधित लोगों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।
इस मामले में यह भी देखा जाएगा कि निजी लाइसेंसी रिवाल्वर को लेकर निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। हथियार किस स्थिति में रखा गया था, गोली चलने से ठीक पहले क्या किया जा रहा था और चौकीदार उस समय किस स्थान पर मौजूद थे, जैसे सवाल जांच के केंद्र में रह सकते हैं।
घटना को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच का इंतजार करना जरूरी है। प्रारंभिक तौर पर इसे हथियार की सफाई के दौरान हुई घटना बताया जा रहा है, लेकिन वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। यदि सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी हो सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता घायल चौकीदार की हालत को लेकर है। गंभीर स्थिति में उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में उपचार के लिए भेजा गया है। वहीं कोतवाली परिसर के अंदर निजी रिवाल्वर से गोली चलने की इस घटना ने हथियारों की सुरक्षित हैंडलिंग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।