चंडीगढ़: हरियाणा में बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी और इंजीनियर एकजुट हो गए हैं। निजी बिजली कंपनियों को समानांतर लाइसेंस देने, कृषि क्षेत्र के लिए अलग एग्री डिस्कॉम बनाने और स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था के विरोध में चार प्रमुख यूनियनों ने मिलकर हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा का गठन किया है।
मोर्चा ने सरकार की नीतियों के विरोध में 11 से 13 अगस्त तक तीन दिवसीय हड़ताल करने की घोषणा की है। आंदोलन को संचालित करने के लिए 16 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है, जो पूरे प्रदेश में विरोध कार्यक्रमों का नेतृत्व करेगी।
निजीकरण के फैसलों का विरोध
बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का कहना है कि बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने से कर्मचारियों और आम उपभोक्ताओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यूनियनों का आरोप है कि सरकार बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं।
मोर्चा नेताओं का कहना है कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा का संचालन जनहित को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि निजीकरण से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है और कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
समानांतर लाइसेंस व्यवस्था पर आपत्ति
कर्मचारी संगठनों ने गुरुग्राम और नूंह में निजी बिजली कंपनियों को समानांतर लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर भी विरोध जताया है। उनका कहना है कि इससे सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की भूमिका कमजोर होगी और भविष्य में कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
यूनियनों का तर्क है कि सरकारी बिजली कंपनियां लंबे समय से उपभोक्ताओं को सेवाएं दे रही हैं और उनकी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है, न कि निजी कंपनियों को समानांतर व्यवस्था देने की।
एग्री डिस्कॉम और स्मार्ट मीटरिंग का मुद्दा
मोर्चा ने कृषि क्षेत्र के लिए अलग एग्री डिस्कॉम बनाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है। कर्मचारियों का कहना है कि बिजली वितरण व्यवस्था को अलग-अलग हिस्सों में बांटने से किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है।
इसके अलावा स्मार्ट मीटरिंग योजना को लेकर भी कर्मचारी संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने से पहले इससे जुड़े सभी पहलुओं पर विचार किया जाना चाहिए और उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
चार यूनियनों ने बनाया संयुक्त मोर्चा
बिजली क्षेत्र से जुड़ी चार यूनियनों ने एक मंच पर आकर संयुक्त संघर्ष मोर्चा बनाया है। इसका उद्देश्य निजीकरण और अन्य नीतिगत फैसलों के खिलाफ सामूहिक आंदोलन चलाना है।
मोर्चा की 16 सदस्यीय कमेटी आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी और प्रदेशभर में कर्मचारियों के साथ समन्वय स्थापित करेगी। यूनियन नेताओं का कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
तीन दिन की हड़ताल से सेवाओं पर असर की आशंका
11 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित हड़ताल के कारण बिजली सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य उपभोक्ताओं को परेशान करना नहीं, बल्कि सरकार तक अपनी मांगों को पहुंचाना है।
मोर्चा नेताओं ने कहा कि बिजली कर्मचारियों ने हमेशा आपात परिस्थितियों में सेवाएं दी हैं, लेकिन उनकी समस्याओं और मांगों को भी गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
सरकार से बातचीत की मांग
बिजली कर्मचारी और इंजीनियर संगठनों ने सरकार से बातचीत कर समस्याओं का समाधान निकालने की मांग की है। उनका कहना है कि टकराव की स्थिति से बचने के लिए सरकार को कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करनी चाहिए।
यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।
आंदोलन की तैयारियां शुरू
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने हड़ताल को सफल बनाने के लिए प्रदेशभर में कर्मचारियों से संपर्क शुरू कर दिया है। जिला स्तर पर बैठकें आयोजित कर आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है।
मोर्चा नेताओं का कहना है कि बिजली क्षेत्र से जुड़े सभी कर्मचारी और इंजीनियर एकजुट होकर अपने अधिकारों और सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को बचाने के लिए संघर्ष करेंगे।
फिलहाल, हरियाणा में बिजली निजीकरण के मुद्दे पर कर्मचारी संगठनों और सरकार के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब नजर इस बात पर है कि हड़ताल से पहले सरकार और यूनियनों के बीच कोई बातचीत होती है या नहीं।