प्रॉपर्टी आईडी में सुधार के नाम पर 5 हजार की रिश्वत, नगर निगम का क्लर्क रंगे हाथों गिरफ्तार
करनाल। एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने नगर निगम की टैक्स ब्रांच में तैनात एक क्लर्क को 5 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू किया है। आरोपी क्लर्क की पहचान गौरव के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने एक नागरिक की प्रॉपर्टी आईडी में श्रेणी संबंधी सुधार करने के बदले 5 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने कार्रवाई की और मंगलवार सुबह पुराने बस स्टैंड के पास आरोपी को कथित रिश्वत की रकम लेते पकड़ लिया।
मामले में एसीबी ने आरोपी क्लर्क के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसी अब शिकायत, लेन-देन और प्रॉपर्टी आईडी में सुधार से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।
शिकायतकर्ता ने एंटी करप्शन ब्यूरो को बताया था कि उसके पिता धर्मबीर और माता परमजीत कौर उसके घर के मालिक हैं। प्रॉपर्टी आईडी में श्रेणी से संबंधित एक सुधार करवाना था। इसके लिए नगर निगम करनाल के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया गया था।
ऑनलाइन आवेदन करने के बाद शिकायतकर्ता नगर निगम कार्यालय पहुंचा। वहां उसने अपनी समस्या टैक्स शाखा में तैनात क्लर्क गौरव को बताई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि काम करने के बदले क्लर्क ने उससे 5 हजार रुपये की रिश्वत मांगी।
शिकायतकर्ता ने पैसे देने के बजाय पूरे मामले की जानकारी एंटी करप्शन ब्यूरो को दी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने मामले को गंभीरता से लिया और कार्रवाई के लिए टीम गठित की।
एसीबी के मुताबिक शिकायत के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की गई। आरोपी क्लर्क से होने वाली बातचीत और पैसे देने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए टीम को निर्धारित स्थान के आसपास तैनात किया गया।
मंगलवार सुबह आरोपी गौरव ने शिकायतकर्ता को कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेकर पुराने बस स्टैंड पर बुलाया। समय सुबह करीब 9 बजे का बताया गया है। शिकायतकर्ता तय योजना के अनुसार वहां पहुंचा।
आरोप है कि पुराने बस स्टैंड पर गौरव ने शिकायतकर्ता से 5 हजार रुपये रिश्वत के रूप में स्वीकार कर लिए। इसी दौरान पहले से मौजूद एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही पकड़ लिया।
एसीबी टीम ने आरोपी क्लर्क को हिरासत में लेने के बाद आवश्यक कार्रवाई शुरू की। उसके खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
मामले का केंद्र प्रॉपर्टी आईडी में श्रेणी सुधार से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने यह काम करवाने के लिए नगर निगम के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन किया था। इसके बाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए नगर निगम कार्यालय पहुंचने पर उसकी मुलाकात टैक्स ब्रांच के क्लर्क गौरव से हुई थी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि सरकारी प्रक्रिया के तहत होने वाले काम के बदले उससे 5 हजार रुपये की मांग की गई। उसने यह रकम देने से पहले एसीबी को जानकारी दी, जिसके बाद पूरी कार्रवाई की योजना बनाई गई।
एंटी करप्शन ब्यूरो अब यह भी देख रहा है कि आवेदन किस स्थिति में था और सुधार की प्रक्रिया में क्लर्क की क्या भूमिका थी। संबंधित रिकॉर्ड और आवेदन से जुड़े दस्तावेजों को भी जांच में शामिल किया जा सकता है।
आरोपी नगर निगम की टैक्स शाखा में तैनात था। इसी शाखा में प्रॉपर्टी टैक्स और संपत्ति से संबंधित कई तरह के रिकॉर्ड और आवेदन आते हैं। शिकायतकर्ता भी अपनी प्रॉपर्टी आईडी में श्रेणी सुधार के मामले को लेकर इसी शाखा में पहुंचा था।
एसीबी की कार्रवाई के बाद नगर निगम कार्यालय में भी मामला चर्चा का विषय बन गया। सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में कर्मचारी की गिरफ्तारी ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि आरोपी पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल एसीबी ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है।
जांच के दौरान शिकायतकर्ता के बयान को रिकॉर्ड किया जाएगा। इसके साथ ही रिश्वत की कथित रकम, आवेदन और आरोपी की भूमिका से जुड़े तथ्यों को भी देखा जाएगा।
एसीबी की टीम यह भी जांच सकती है कि शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच इससे पहले क्या बातचीत हुई थी और रिश्वत की मांग किस परिस्थिति में की गई थी।
इस मामले में ऑनलाइन आवेदन का रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो सकता है। नगर निगम के पोर्टल पर आवेदन कब किया गया, आवेदन किस अधिकारी या कर्मचारी के स्तर पर लंबित था और श्रेणी सुधार की प्रक्रिया क्या थी, इन पहलुओं की जांच की जा सकती है।
शिकायतकर्ता ने अपने पिता धर्मबीर और माता परमजीत कौर के नाम दर्ज घर की प्रॉपर्टी आईडी में श्रेणी संबंधी सुधार के लिए आवेदन किया था। उसका कहना है कि इसी काम को करवाने के बदले 5 हजार रुपये की मांग की गई।
एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत मिलते ही टीम बनाने और कार्रवाई करने का फैसला किया गया। आरोपी को निर्धारित स्थान पर पैसे लेते समय पकड़ना इस कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
पुराने बस स्टैंड पर हुई कार्रवाई के दौरान आरोपी के पास से रिश्वत की कथित रकम बरामद किए जाने के बाद उसे हिरासत में लिया गया।
इसके बाद संबंधित दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। अब आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के आधार पर होगी।
एसीबी की जांच में यदि अन्य शिकायतें या इसी तरह के किसी पुराने मामले का रिकॉर्ड सामने आता है तो उनकी भी पड़ताल की जा सकती है। फिलहाल एजेंसी का फोकस मौजूदा शिकायत और 5 हजार रुपये की कथित रिश्वत के मामले पर है।
नगर निगम में प्रॉपर्टी से जुड़े काम ऑनलाइन किए जाने के बावजूद शिकायतकर्ता को कार्यालय जाना पड़ा था। वहीं पहुंचने के बाद रिश्वत की मांग किए जाने का आरोप सामने आया।
इस मामले ने एक बार फिर सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और नागरिकों के काम समय पर होने के सवाल को सामने ला दिया है।
एसीबी की ओर से आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने का दावा किया गया है। हालांकि अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर ही अंतिम जिम्मेदारी तय होगी।
फिलहाल आरोपी क्लर्क गौरव के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो उसकी भूमिका, आवेदन की स्थिति और कथित रिश्वत की मांग से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रहा है।
मामले में आगे की कार्रवाई जांच पूरी होने और संबंधित दस्तावेजों व बयानों के आधार पर तय की जाएगी