Haryana हरियाणा में तेजी से बढ़ती अवैध कॉलोनियों और फर्जी दस्तावेजों के मामलों पर लगाम लगाने के लिए सरकार डिजिटल सत्यापन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है। इसी कड़ी में आधार वेरिफिकेशन को एक अहम उपाय के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि जमीन और निर्माण से जुड़े कामों में पारदर्शिता बढ़े और फर्जी तरीके से जारी होने वाली NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) पर रोक लगाई जा सके।

अवैध कॉलोनियों का विस्तार लंबे समय से हरियाणा के कई शहरों में बड़ी चुनौती बना हुआ है। कई जगहों पर बिना अनुमति के प्लॉट काट दिए जाते हैं और लोगों को अधूरी जानकारी देकर जमीन बेच दी जाती है। बाद में खरीदारों को बिजली, पानी, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है।सरकार का मानना है कि आधार आधारित पहचान सत्यापन से जमीन से जुड़े लेन-देन में शामिल लोगों की पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे फर्जी नामों, गलत दस्तावेजों और संदिग्ध आवेदनों की जांच आसान हो सकती है। अधिकारियों को उम्मीद है कि डिजिटल प्रक्रिया से रिकॉर्ड में गड़बड़ी कम होगी और अवैध गतिविधियों पर निगरानी बढ़ेगी।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि केवल आधार वेरिफिकेशन से ही अवैध कॉलोनियों की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसके लिए जमीन रिकॉर्ड की जांच, अधिकारियों की जवाबदेही, अवैध निर्माण पर कार्रवाई और रियल एस्टेट नियमों का सख्ती से पालन भी जरूरी होगा। फर्जी NOC के जरिए कई बार जमीन उपयोग में बदलाव या निर्माण की अनुमति लेने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों में यदि आवेदनकर्ता और दस्तावेजों की डिजिटल जांच मजबूत होगी तो फर्जीवाड़े को शुरुआती स्तर पर रोका जा सकता है।

हरियाणा सरकार की यह पहल जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लाने की कोशिश मानी जा रही है। आने वाले समय में यदि आधार वेरिफिकेशन के साथ अन्य डिजिटल प्रणालियों को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो अवैध कॉलोनियों के विस्तार को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि नई व्यवस्था को जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी बनाया जाता है। क्योंकि अवैध कॉलोनियों पर रोक लगाने के लिए तकनीक के साथ-साथ प्रशासनिक सख्ती और नियमित निगरानी भी जरूरी होगी।

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