फिरोजपुर छावनी स्थित सारागढ़ी स्मारक से अज्ञात लोगों द्वारा सजावटी लाइटें, रेलिंग और धातु का अन्य सामान चोरी कर लिए जाने की खबर है। इस घटना ने जिले की धरोहर स्थलों (हेरिटेज साइट्स) की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से बना यह स्मारक 36वीं सिख रेजिमेंट के उन 21 सैनिकों के बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने 1897 में सारागढ़ी की ऐतिहासिक लड़ाई में अफरीदी कबीले के बड़ी संख्या में हमलावरों का सामना किया था। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इसकी आधारशिला रखी थी, और लगभग एक साल पहले कैबिनेट मंत्री बलजीत कौर ने इसका उद्घाटन किया था।
ऐसा लगता है कि अब यह स्मारक उचित रखरखाव और सुरक्षा के अभाव का शिकार हो गया है। बताया जा रहा है कि जो सजावटी लाइटें कभी इसकी भव्यता बढ़ाती थीं, उन्हें चोरी कर लिया गया है। इसके अलावा, स्मारक के आसपास की लैंडस्केपिंग और पेड़-पौधों की हालत देखकर लगता है कि यहां काफी उपेक्षा बरती गई है। इस घटना ने जिले के अन्य धरोहर स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी फिर से चिंताएं पैदा कर दी हैं। इससे पहले फिरोजशाह स्थित एंग्लो-सिख युद्ध स्मारक और हुसैनीवाला स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक परिसर में भी चोरी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
एंग्लो-सिख युद्ध स्मारक से कई साल पहले पुरानी पिस्तौलें समेत कई ऐतिहासिक वस्तुएं चोरी हो गई थीं। वहां मौजूद ऐतिहासिक पेंटिंग भी क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुंचा। इसी तरह, हुसैनीवाला के पास स्थित स्मारक पार्क—जहां लोग शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की समाधियों पर श्रद्धांजलि देने आते हैं—वहां भी समय के साथ सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है और कुछ सामान चोरी होने की भी खबर है। इस ताजा घटना पर चिंता जताते हुए, INTACH (इंटेक) के सदस्य रामेश्वर सिंह ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के इतिहास और धरोहर से जुड़े स्मारक चोरी और तोड़फोड़ का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ऐसे स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाई जाए ताकि आगे किसी और नुकसान को रोका जा सके।
समाजसेवी अशोक बहल ने कहा कि स्मारकों को सुरक्षित रखना न केवल सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह उस विरासत और बलिदान को भी सहेजने के लिए आवश्यक है, जिनकी याद में ये स्मारक बनाए गए हैं। इसके अलावा, 'राय सिख भवन' में भी पहले तोड़फोड़ की घटनाएं हो चुकी हैं, जहां से कथित तौर पर दरवाजे, खिड़कियां और बिजली के उपकरण निकाल लिए गए थे। उपायुक्त दीपशिखा शर्मा ने बताया कि जिला प्रशासन ने पुलिस विभाग को पत्र लिखकर चोरी के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने को कहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन जिले में मौजूद ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार करेगा। इस ताजा घटना ने फिरोजपुर के ऐतिहासिक स्थलों के लिए एक व्यापक सुरक्षा और रखरखाव योजना की जरूरत को उजागर किया है। विरासत संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है कि इन ऐतिहासिक स्थलों और उनसे जुड़ी विरासत को बचाए रखने के लिए नियमित निगरानी, ​​पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और समय-समय पर रखरखाव बहुत जरूरी है।
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