13 में से 12 मांगों पर सरकार तैयार
सरकार और सफाई कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत में 13 मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें वेतन, भत्ते, सुरक्षा उपकरण, कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाएं और सेवा शर्तों से जुड़े कई मुद्दे शामिल हैं। सरकार की ओर से अधिकांश मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया गया है। कर्मचारी नेताओं के मुताबिक 13 में से 12 मांगों पर सहमति बनने की स्थिति है। इसके बावजूद नियमितीकरण का मुद्दा हल नहीं होने के कारण कर्मचारी आंदोलन वापस लेने को तैयार नहीं हैं।
नियमित करने की मांग पर फंसा मामला
आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण मांग सफाई कर्मचारियों को नियमित करने की है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को स्थायी नौकरी का लाभ मिले। उनका कहना है कि कई कर्मचारी वर्षों से सफाई व्यवस्था संभाल रहे हैं, लेकिन नियमित कर्मचारी जैसी नौकरी की सुरक्षा और दूसरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। सरकार की ओर से इस मांग पर तत्काल अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। नियमितीकरण का मामला भर्ती नियमों, स्वीकृत पदों, वित्तीय भार और मौजूदा सरकारी नीति से जुड़ा होने के कारण इस पर विस्तृत विचार की जरूरत बताई जा रही है।
कर्मचारी बोले नौकरी की सुरक्षा सबसे जरूरी
कर्मचारी संगठनों के लिए नियमितीकरण केवल एक मांग नहीं बल्कि आंदोलन का मुख्य मुद्दा है। उनका कहना है कि वेतन या दूसरी सुविधाओं में सुधार महत्वपूर्ण है, लेकिन नौकरी सुरक्षित नहीं होने पर कर्मचारियों की मूल समस्या बनी रहेगी। कर्मचारियों का तर्क है कि सफाई व्यवस्था नियमित प्रकृति का काम है। नगर निकायों को हर दिन सफाई कर्मचारियों की जरूरत होती है। ऐसे में वर्षों से यही काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी व्यवस्था में शामिल करने की नीति बनाई जानी चाहिए।
सरकार और कर्मचारियों में बातचीत जारी
नायब सरकार आंदोलन समाप्त कराने के लिए कर्मचारी संगठनों के साथ संवाद बनाए हुए है। अधिकांश मांगों पर सकारात्मक रुख के कारण दोनों पक्षों के बीच समझौते की संभावना भी बनी हुई है। अब पूरी बातचीत नियमितीकरण से जुड़ी मांग के समाधान पर टिक गई है। सरकार के सामने एक चुनौती यह भी है कि सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण पर लिया गया कोई फैसला अन्य विभागों में अनुबंध या अस्थायी आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों की मांगों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए सरकार इस विषय पर नीतिगत और कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहती है।
सफाई व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
सफाई कर्मचारियों के आंदोलन का सीधा असर नगर निकायों की सफाई व्यवस्था पर पड़ने की आशंका रहती है। आंदोलन लंबा खिंचने की स्थिति में कचरा उठाने, सड़कों की सफाई और दूसरी स्वच्छता सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि सरकार भी जल्द समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। स्थानीय निकायों के लिए सफाई कर्मचारी सबसे महत्वपूर्ण मैदानी कर्मचारियों में शामिल हैं। कचरा प्रबंधन से लेकर सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई तक बड़ी जिम्मेदारी इन्हीं कर्मचारियों पर रहती है।
नियमितीकरण बना आंदोलन की चाबी
अब कर्मचारियों की निगाह सरकार के अगले कदम पर है। अगर नियमितीकरण की मांग पर दोनों पक्ष किसी स्वीकार्य समाधान तक पहुंचते हैं तो आंदोलन समाप्त होने का रास्ता खुल सकता है। वहीं इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में कर्मचारी संगठन आंदोलन जारी रख सकते हैं। 13 में से 12 मांगों पर सरकार के सकारात्मक रुख के बावजूद केवल एक मांग का बाकी रहना बताता है कि कर्मचारियों के लिए नौकरी की सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। आंदोलन का अगला चरण अब इसी बात पर निर्भर करेगा कि नायब सिंह सैनी सरकार नियमितीकरण को लेकर क्या रास्ता निकालती है और कर्मचारी संगठन उस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं या नहीं।