रोहतक: जिंदगी की जंग हारने के बाद भी 30 साल की एक महिला छह लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बन गई। ब्रेन हैमरेज के बाद ब्रेन डेड घोषित की गई सेना के एक जवान की पत्नी के परिवार ने मुश्किल घड़ी में अंगदान का फैसला लिया। महिला की दो किडनी लिवर दो कॉर्निया और हृदय जरूरतमंद मरीजों को आवंटित किए गए। इनमें से एक किडनी चंडीमंदिर से करीब 240 किलोमीटर का सफर तय कर रोहतक के पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGIMS) पहुंची। महिला मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली थीं। उनके परिवार में पति और दो बच्चे हैं। ब्रेन हैमरेज होने के बाद उन्हें चंडीमंदिर छावनी स्थित कमांड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और बाद में उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया।
पति ने लिया अंगदान का फैसला
परिवार के लिए यह बेहद मुश्किल समय था। पत्नी को खोने के दुख के बीच उनके पति ने अंगदान की सहमति देकर कई दूसरे परिवारों के लिए जिंदगी की उम्मीद पैदा कर दी। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक महिला की दोनों किडनी लिवर दो कॉर्निया और हृदय अलग-अलग जरूरतमंद मरीजों के लिए आवंटित किए गए। स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (SOTTO) के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह के मुताबिक महिला की एक किडनी रोहतक PGIMS में किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत वाली मरीज के लिए भेजी गई।
240 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर
किडनी को समय पर रोहतक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके लिए चंडीमंदिर से रोहतक तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। हरियाणा पंजाब और चंडीगढ़ पुलिस के साथ रास्ते में आने वाले कई जिलों के अधिकारियों ने आपसी तालमेल बनाकर एंबुलेंस को बिना रुकावट आगे बढ़ाने में मदद की। रोहतक PGIMS की दूरी चंडीगढ़ क्षेत्र से करीब 240 किलोमीटर है। अंग प्रत्यारोपण में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है इसलिए पूरे रास्ते यातायात व्यवस्था इस तरह बनाई गई कि किडनी जल्द से जल्द अस्पताल पहुंच सके।
PGIMS में फूलों से दी गई श्रद्धांजलि
दान की गई किडनी जब PGIMS रोहतक पहुंची तो वहां भावुक माहौल था। पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के कुलपति डॉ. एचके अग्रवाल सहित अस्पताल के अधिकारी संस्थान के गेट पर मौजूद रहे।
किडनी को अस्पताल के सेंट्रल स्टोर से मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर तक सम्मान के साथ ले जाया गया। रास्ते में फूल रखकर दिवंगत महिला के अंगदान के फैसले को श्रद्धांजलि दी गई। डॉ. अग्रवाल ने परिवार के फैसले को मानवता के लिए बड़ा त्याग बताया। PGIMS के निदेशक डॉ. एसके सिंघल ने भी लोगों से अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियों से बाहर निकलने और इसके लिए आगे आने की अपील की। महिला का जीवन महज 30 वर्ष की उम्र में समाप्त हो गया लेकिन उनके परिवार के एक फैसले ने छह जरूरतमंद लोगों को नई उम्मीद दी। यह घटना अंगदान के महत्व का एक प्रेरक उदाहरण बन गई है।
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