हरियाणा Haryana : पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) को फटकार लगाई है, जिसने किफायती आवास के लिए बनाए गए लेआउट को "समाज के उच्च वर्ग के लिए" ऊंची कीमत वाले प्लॉट में बदल दिया। कोर्ट ने कहा कि यह कदम "संवैधानिक और प्रशासनिक कानून के सिद्धांतों का उल्लंघन करके शोषण और भेदभाव" को दिखाता है।
दो याचिकाओं को मंज़ूरी देते हुए, जस्टिस अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल और दीपक मनचंदा की बेंच ने अलॉट किए गए प्लॉट को रद्द करने को HSVP का "अनुचित, मनमाना और दुर्भावनापूर्ण" आचरण बताया, और हर मामले में 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। अथॉरिटी को निर्देश दिया गया कि वह तीन महीने के अंदर संशोधित प्लान में नया प्लॉट बनाकर या किसी उचित विकल्प के ज़रिए याचिकाकर्ताओं को उसी इलाके में अलॉटमेंट बहाल करे।
एक याचिका CRPF कमांडेंट ने दायर की थी, जिन्होंने एक प्लॉट के लिए ई-नीलामी में हिस्सा लिया था। रकम जमा करने के बाद, उन्हें पज़ेशन लेटर जारी किया गया और 2 दिसंबर, 2023 को सेक्टर 5, पिंजौर में 162 वर्ग मीटर के प्लॉट का सांकेतिक कब्ज़ा दिया गया। हालांकि, डेवलपमेंट न होने के कारण फिजिकल कब्ज़ा नहीं दिया गया, और 20 फरवरी, 2024 को रकम वापस कर दी गई, जब HSVP ने छोटे प्लॉट को हटाने और सिर्फ़ 1,000 वर्ग गज के प्लॉट विकसित करने का फैसला किया।
बेंच के सामने मुद्दा यह था कि पेमेंट और पज़ेशन लेटर जारी होने के बावजूद, "बिना कोई नोटिस, कारण बताए या कोई आदेश पारित किए" एकतरफा अलॉटमेंट रद्द कर दिया गया और रकम वापस कर दी गई।
कोर्ट ने कहा कि HSVP का गठन "बिना लाभ-बिना हानि" के आधार पर किफायती आवास प्रदान करने के लिए किया गया था और उससे निष्पक्ष रूप से काम करने की उम्मीद थी। बेंच ने कहा, "इसके विपरीत, प्रतिवादी-HSVP का आचरण लाभ-संचालित और मध्यम और निम्न-आय वाले नागरिकों के लिए हानिकारक लगता है, इस प्रकार यह अपने वैधानिक उद्देश्य के विपरीत है।" दलीलों और मूल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए, कोर्ट ने पाया कि "मूल प्लॉट का विज्ञापन करने से पहले उचित सावधानी की कमी थी और बाद में रद्द करने के लिए कोई वास्तविक कारण नहीं थे"।
याचिकाकर्ता की परिस्थितियों पर ध्यान देते हुए, कोर्ट ने कहा: "हम इस तथ्य को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते कि याचिकाकर्ता ने एक सरकारी कर्मचारी के रूप में घर बनाने के लिए अपनी पूरी ज़िंदगी की बचत निवेश की... फिर भी, बिना कोई कारण बताए अलॉटमेंट रद्द कर दिया गया।" HSVP के पॉलिसी क्लॉज़ और पहाड़ी इलाके के दावों को खारिज करते हुए, कोर्ट ने कहा कि उसी ज़मीन को समतल करके बड़े प्लॉट में बदल दिया गया था, जिससे यह सफ़ाई "दोनों तरह से अनुचित और गलत" हो जाती है।
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