Sonipat: छात्राओं ने प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया
प्रोफेसर पर आरोप, डीक्रस्ट छात्राओं ने की शिकायत
सोनीपत: दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मुरथल में छात्राओं की ओर से एक प्रोफेसर पर लगाए गए यौन उत्पीड़न और आपत्तिजनक व्यवहार के आरोपों को विश्वविद्यालय ने गंभीरता से लिया है। कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद मामले को निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के तहत आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) को सौंपा गया है। समिति संबंधित छात्राओं और प्रोफेसर का पक्ष सुनकर नियमानुसार अपनी अनुशंसा देगी।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर उनसे पूछते हैं कि प्रपोज कैसे किया जाता है और विदेशी लड़कियों को लेकर भी आपत्तिजनक सवाल करते हैं। एक छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर ने उससे कहा कि उनके कहे अनुसार चलोगी तो जिंदगी में खुश रहोगी। छात्राओं का कहना है कि इस व्यवहार से वे कक्षा में खुद को असहज और असुरक्षित महसूस करती हैं। कई छात्राओं ने दावा किया कि प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
छात्राओं के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन को 19, 20 और 21 अगस्त को शिकायत दी गई थी। विरोध प्रदर्शन की चेतावनी के बाद आंतरिक जांच कमेटी बनाई गई, लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया। छात्राओं का दावा है कि 30 से अधिक छात्राओं के साथ इसी तरह के व्यवहार की शिकायतें सामने आई हैं। एक कक्षा में 68 विद्यार्थी होने की बात भी छात्राओं ने कही है।
छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रोफेसर कुछ छात्राओं पर परीक्षा में नकल करने जैसे आरोप लगाते हैं, जबकि उनके अनुसार संबंधित छात्राओं की कोई जांच तक नहीं हुई। छात्राओं ने कुलसचिव सहित विश्वविद्यालय के अधिकारियों को शिकायत देने की बात कही है। उन्होंने संबंधित प्रोफेसर को विश्वविद्यालय परिसर से हटाने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को नौ सितंबर तक कार्रवाई का समय दिया था। कार्रवाई नहीं होने पर शुक्रवार से विरोध प्रदर्शन शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने अपनी सुरक्षा और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए हरियाणा सरकार से भी हस्तक्षेप की अपील की है। पुलिस को शिकायत देने की बात भी छात्राओं ने कही है।
मामले में विश्वविद्यालय कुलगुरु प्रो. श्री प्रकाश सिंह ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि छात्राओं की शिकायत को विश्वविद्यालय ने गंभीरता से लिया है और निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई है। शिकायत मिलने के बाद मामले को आवश्यक प्रक्रिया के तहत आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के समक्ष भेजा गया, जहां छात्राओं के बयान दर्ज किए जा चुके हैं तथा संबंधित प्रोफेसर का पक्ष भी मांगा गया है।
कुलगुरु ने कहा कि मामला वर्तमान में आईसीसी के विचाराधीन है, इसलिए आरोपों की सत्यता या किसी की दोषसिद्धि पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। विश्वविद्यालय छात्राओं की सुरक्षा, सम्मान और सभी पक्षों को निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।