चंडीगढ़। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार पर गरीब, मजदूर और किसानों के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण आम लोगों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा लगातार कमजोर हो रही है। उन्होंने ग्रामीण रोजगार, सफाई एवं सीवर कर्मचारियों के आंदोलन और फसल बीमा योजना से जुड़े किसानों के मुद्दों को लेकर सरकार से संवेदनशीलता के साथ कदम उठाने की मांग की।

कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने वर्ष 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) लागू कर ग्रामीण परिवारों को रोजगार का कानूनी अधिकार दिया था। इस कानून का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना था। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने गांवों में रोजगार और आय के संकट से जूझ रहे परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा उपलब्ध कराया।

सैलजा ने कहा कि जुलाई 2026 से लागू नई व्यवस्था में ग्रामीण गरीबों के रोजगार के अधिकार से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जरूरतमंद परिवारों को समय पर काम मिले और रोजगार की प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा पैदा न हो। उनके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का अवसर केवल आय का साधन नहीं है, बल्कि यह गरीब परिवारों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।

सांसद ने कहा कि देश और प्रदेश में बड़ी संख्या में मजदूर वर्ग आज भी आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में रोजगार से जुड़े अधिकारों को कमजोर करने के बजाय सरकार को उन्हें और मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग और जरूरत के अनुरूप योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।

कुमारी सैलजा ने हरियाणा में सफाई, सीवर और अग्निशमन कर्मचारियों के आंदोलन का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ये कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों और अधिकारों को लेकर आंदोलनरत हैं। सफाई, सीवर और अग्निशमन सेवाएं आम जनता के जीवन और सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई हैं। ऐसे में इन सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

उन्होंने सरकार से हठधर्मिता छोड़कर कर्मचारियों के साथ बातचीत करने की अपील की। सैलजा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में कर्मचारियों की जायज मांगों का समाधान संवाद और सहमति के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं को समझते हुए ऐसा सम्मानजनक समाधान निकालना चाहिए, जिससे कर्मचारियों के हितों की रक्षा हो और आम जनता को भी आवश्यक सेवाओं में परेशानी न उठानी पड़े।

सांसद ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसान फसल बीमा के लिए नियमित रूप से प्रीमियम का भुगतान करते हैं, लेकिन जब प्राकृतिक आपदा, खराब मौसम या अन्य कारणों से फसल को नुकसान पहुंचता है तो उन्हें मुआवजा हासिल करने के लिए अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

सैलजा ने कहा कि किसानों को खराबे की सूचना देने, फसल का सर्वे करवाने और मुआवजा प्राप्त करने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना का मूल उद्देश्य किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा देना है, लेकिन यदि किसान को नुकसान के बाद भी मुआवजे के लिए लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़े तो योजना का उद्देश्य प्रभावित होता है।

उन्होंने सरकार से मांग की कि फसल नुकसान के आकलन और मुआवजे की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए। किसानों को नुकसान की सूचना दर्ज कराने और सर्वे की प्रक्रिया में अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलनी चाहिए। साथ ही, पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार जल्द से जल्द मुआवजा उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

कुमारी सैलजा ने कहा कि किसान, मजदूर और गरीब वर्ग देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था की मजबूत नींव हैं। इसलिए सरकार की नीतियों का केंद्र इन्हीं वर्गों की आर्थिक सुरक्षा और सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोजगार का अधिकार, श्रमिकों की जायज मांगें और किसानों को फसल नुकसान का उचित मुआवजा जैसे मुद्दे केवल राजनीतिक विषय नहीं, बल्कि आम जनता के जीवन से सीधे जुड़े सवाल हैं।

सैलजा ने केंद्र और हरियाणा सरकार से गरीबों, मजदूरों और किसानों के हित में ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि सरकार को जनहित से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार कर्मचारियों और किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था के माध्यम से करेगी, ताकि प्रदेश के कमजोर और मेहनतकश वर्गों को राहत मिल सके।

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