चंडीगढ़। हरियाणा में अब सभी सरकारी विभागों को आमजन से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं सार्वजनिक करनी होंगी। राज्य सरकार ने सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) की धारा 4 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में कदम उठाया है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि आरटीआई अधिनियम की धारा 4 का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत जिन सूचनाओं को विभागों की ओर से स्वत: सार्वजनिक किया जाना अनिवार्य है, उन्हें संबंधित विभागों की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना और आम नागरिकों को जरूरी सूचनाओं के लिए बार-बार आरटीआई आवेदन दाखिल करने की आवश्यकता को कम करना है। धारा 4 के तहत ऐसी कई सूचनाओं का स्वत: प्रकटीकरण किया जाना है, जिनसे नागरिकों को विभाग की कार्यप्रणाली, अधिकारियों की जिम्मेदारियों और निर्णय लेने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिल सके।

मुख्य सचिव ने प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभागों में धारा 4 के तहत आने वाली सूचनाओं की पहचान कर उन्हें निर्धारित तरीके से सार्वजनिक करें। इसके साथ ही विभागीय वेबसाइटों पर उपलब्ध सूचनाओं को नियमित रूप से अपडेट करने और यह सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है कि आमजन को जानकारी हासिल करने में किसी तरह की परेशानी न हो।

राज्य सूचना आयोग ने भी इस संबंध में 22 जून को आदेश जारी किया था। आयोग ने स्पष्ट किया था कि सरकारी विभागों को आरटीआई अधिनियम की धारा 4 के तहत निर्धारित सूचनाओं को स्वत: सार्वजनिक करना होगा। इसका उद्देश्य सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।

आयोग के आदेश के अनुसार विभागों को अपने संगठन, कार्यप्रणाली और अधिकारियों के अधिकार एवं दायित्व से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इसके अलावा विभाग में निर्णय लेने की प्रक्रिया, विभिन्न स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ी सूचनाएं भी आमजन के लिए उपलब्ध करानी होंगी।

इसी तरह विभागों के कामकाज के मानक, लागू नियम-कायदे, निर्देश, मैनुअल और रिकॉर्ड से संबंधित आवश्यक जानकारी भी सार्वजनिक की जानी है। इन सूचनाओं को विभागीय वेबसाइटों पर इस तरह उपलब्ध कराने के निर्देश हैं, ताकि आम नागरिक उन्हें आसानी से देख और समझ सकें।

आरटीआई आवेदन का बोझ होगा कम

धारा 4 के तहत सूचनाओं के स्वत: प्रकटीकरण का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि नागरिकों को सामान्य और सार्वजनिक महत्व की जानकारी हासिल करने के लिए अलग से आरटीआई आवेदन दाखिल करने की जरूरत कम पड़ेगी। फिलहाल कई मामलों में नागरिकों को विभागों से सामान्य प्रशासनिक जानकारी प्राप्त करने के लिए भी आरटीआई का सहारा लेना पड़ता है। यदि संबंधित सूचनाएं पहले से वेबसाइट पर उपलब्ध रहेंगी तो नागरिक सीधे ऑनलाइन जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

इस व्यवस्था से सूचना मांगने वाले नागरिकों और सरकारी विभागों, दोनों का समय बचने की उम्मीद है। साथ ही, आरटीआई आवेदनों की संख्या कम होने से विभागों पर जवाब तैयार करने का प्रशासनिक दबाव भी घट सकता है।

वेबसाइट पर आसानी से मिलेगी जानकारी

सरकार की ओर से विभागीय वेबसाइटों को सूचना के सार्वजनिक मंच के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है। इसके तहत वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी स्पष्ट, अद्यतन और आमजन के लिए आसानी से सुलभ होनी चाहिए। विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि महत्वपूर्ण सूचनाएं वेबसाइट पर नियमित रूप से अपडेट होती रहें और पुरानी अथवा अप्रासंगिक जानकारी को आवश्यकतानुसार संशोधित किया जाए।

धारा 4 के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन से सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी बनने की उम्मीद है। नागरिकों को यह जानने में आसानी होगी कि किसी विभाग का संगठनात्मक ढांचा क्या है, किस अधिकारी के पास कौन-सी जिम्मेदारी है और किसी निर्णय तक पहुंचने की प्रक्रिया क्या है।

निगरानी और जवाबदेही पर जोर

राज्य सूचना आयोग के आदेश में निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। इससे नागरिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि विभागीय कार्यों की निगरानी किस स्तर पर होती है और अधिकारियों की जिम्मेदारियां किस प्रकार तय की गई हैं।

सरकार का मानना है कि सरकारी सूचनाओं के अधिक से अधिक स्वत: प्रकटीकरण से प्रशासन और जनता के बीच विश्वास मजबूत होगा। जब नागरिकों को विभागीय कामकाज और निर्णय प्रक्रिया की जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी, तो सरकारी व्यवस्था के प्रति पारदर्शिता बढ़ेगी और शिकायतों तथा अनावश्यक भ्रम की स्थिति को कम किया जा सकेगा।

मुख्य सचिव के निर्देशों के बाद अब सभी विभागों को धारा 4 के तहत आने वाली सूचनाओं की समीक्षा कर उन्हें आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई करनी होगी। इस प्रक्रिया में प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

सरकार का यह कदम आरटीआई कानून की भावना के अनुरूप सूचना को नागरिकों तक proactively पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि सभी विभाग इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन करते हैं, तो आमजन को सरकारी सूचनाओं तक बेहतर और आसान पहुंच मिल सकेगी। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि सरकारी कामकाज में जवाबदेही की व्यवस्था भी और मजबूत होगी।

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