हरियाणा में 5 और 6 नवंबर को रोडवेज का चक्का जाम, 20 हजार कर्मचारियों की हड़ताल का ऐलान
चंडीगढ़। हरियाणा में नवंबर की शुरुआत में रोडवेज बसों से सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 5 और 6 नवंबर 2026 को दो दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार ने 4 नवंबर तक उनकी मांगों पर सहमति के अनुसार लिखित आदेश और परिपत्र जारी नहीं किए, तो प्रदेशभर में रोडवेज बसों का चक्का जाम किया जाएगा। हड़ताल की तैयारियों के तहत राज्य के विभिन्न डिपो में गेट मीटिंग आयोजित की जा रही हैं। कर्मचारी नेताओं का दावा है कि इस आंदोलन में करीब 20 हजार कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। यदि हड़ताल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होती है, तो बस सेवाएं प्रभावित होने से दैनिक यात्रियों, विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल हड़ताल प्रस्तावित है और बस सेवाएं बंद होने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा और विभिन्न कर्मचारी यूनियनों ने सरकार पर लंबे समय से लंबित मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि कई मांगों पर पहले ही सहमति बन चुकी है, लेकिन संबंधित आदेश जारी नहीं किए गए हैं। इसी वजह से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
सांझा मोर्चा के वरिष्ठ नेता निशान सिंह, जयबीर घणघस और अनूप लाठर ने कहा कि यह हड़ताल केवल कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यह आंदोलन सरकारी परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने, आम जनता को सस्ती यात्रा उपलब्ध कराने और बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सुरक्षित रखने से भी जुड़ा है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकारी परिवहन सेवाओं का विस्तार करने के बजाय निजी बसों को बढ़ावा देने की नीतियां रोडवेज के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने निजी परमिट जारी करने की योजना और किलोमीटर स्कीम का विरोध किया है।
संगठनों की प्रमुख मांग है कि निजीकरण से संबंधित योजनाओं की समीक्षा की जाए और सरकारी बसों की संख्या बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि प्रदेश की बढ़ती आबादी के अनुरूप रोडवेज के बेड़े में नई बसें शामिल करना जरूरी है।
इसके साथ ही प्रत्येक गांव तक सरकारी बस सेवा उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है। कर्मचारी नेताओं का तर्क है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता बढ़ने से विद्यार्थियों, बुजुर्गों और सामान्य यात्रियों को लाभ मिलेगा।
महिला यात्रियों और छात्राओं की सुविधा को देखते हुए स्कूल और कॉलेज के समय विशेष सरकारी बसें चलाने की मांग भी की गई है। मोर्चा का कहना है कि सुरक्षित और सुलभ परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
हड़ताल के पीछे सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा 8 सितंबर 2026 को परिवहन मंत्री अनिल विज के साथ हुई बैठक में बनी सहमति को लागू नहीं किया जाना बताया जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, उस बैठक में विभिन्न मांगों पर बातचीत हुई थी और सरकार की ओर से निर्धारित अवधि में आवश्यक परिपत्र जारी करने का आश्वासन दिया गया था।
मोर्चा नेताओं का कहना है कि सहमति बनने के बावजूद अब तक संबंधित आदेश जारी नहीं हुए हैं। इसी कारण कर्मचारी संगठनों ने 4 नवंबर तक का समय देते हुए दो दिवसीय हड़ताल की चेतावनी दी है।
कर्मचारियों ने 23 अक्टूबर को विभिन्न डिपो महाप्रबंधकों के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम हड़ताल का नोटिस भी भेजा था। इसके बाद से प्रदेशभर में कर्मचारियों को आंदोलन के लिए एकजुट करने की गतिविधियां तेज कर दी गई हैं।
जींद डिपो में मंगलवार को आयोजित गेट मीटिंग में बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया। इस दौरान कर्मचारी नेताओं ने प्रस्तावित हड़ताल की तैयारियों पर चर्चा की और कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन में भाग लेने की अपील की।
बैठक में जयबीर घणघस, जगदीप लाठर, वीरेंद्र सिंह, नीरज शर्मा, संजीव कुमार, सुरेंद्र कुमार, कृष्ण नोहरा, श्रीभगवान, पवन सहारण, अशोक खोखर और अनूप लाठर सहित कई कर्मचारी नेता मौजूद रहे।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि रोडवेज के संचालन में चालक, परिचालक, तकनीकी कर्मचारी और कार्यशाला कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में कर्मचारियों की मांगों का समाधान किए बिना परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना कठिन हो सकता है।
संगठनों ने चालक और परिचालकों के वेतनमान में सुधार की मांग की है। इसके अलावा परिचालकों को लिपिकों के समान वेतन संबंधी लाभ उपलब्ध कराने और पदोन्नति के लंबित मामलों का निपटारा करने की मांग भी उठाई गई है।
वर्ष 2016 में भर्ती चालकों को नियुक्ति तिथि से नियमित करने और उपनिरीक्षकों के रिक्त पदों पर पदोन्नति की मांग भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि विभाग में रिक्त पड़े पदों पर स्थायी भर्ती की जानी चाहिए, ताकि कर्मचारियों पर कार्यभार कम हो और बस सेवाओं का संचालन बेहतर ढंग से हो सके।
इसके अलावा हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित करने की मांग भी उठाई गई है।
कर्मचारी संगठनों ने आर्थिक लाभों से जुड़ी कई मांगें भी सरकार के सामने रखी हैं। इनमें दिवाली बोनस का भुगतान, 33 अर्जित अवकाश बहाल करना और रात्रि भत्ता उपलब्ध कराना शामिल है।
मोर्चा के अनुसार, कर्मचारियों को 30 रुपये रात्रि भत्ता देने, बिना शर्त ओवरटाइम का भुगतान करने और चार घंटे की ड्यूटी के बाद विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
इसके अलावा वॉशिंग भत्ता और अन्य लंबित लाभों को लागू करने की मांग भी की गई है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि लंबे समय से इन मुद्दों पर निर्णय नहीं होने के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
हरियाणा रोडवेज राज्य की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकारी बसों के माध्यम से बड़ी संख्या में यात्री प्रतिदिन एक जिले से दूसरे जिले और ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों तक सफर करते हैं।
विशेष रूप से विद्यार्थी, नौकरीपेशा लोग, छोटे व्यापारी और बुजुर्ग यात्री रोडवेज बसों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि दो दिन तक बसों का संचालन प्रभावित होता है, तो दैनिक आवागमन की व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
कर्मचारी संगठनों के अनुसार, हरियाणा रोडवेज के 24 डिपो और 13 सब-डिपो के लगभग 20 हजार कर्मचारी प्रस्तावित हड़ताल में शामिल हो सकते हैं।
हालांकि यह कर्मचारी संगठनों की ओर से बताई गई संभावित भागीदारी है। वास्तव में कितने कर्मचारी हड़ताल में शामिल होंगे और कितनी बस सेवाएं प्रभावित होंगी, यह 5 नवंबर को ही स्पष्ट हो सकेगा।
यदि बड़ी संख्या में कर्मचारी काम बंद करते हैं, तो यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन साधनों पर निर्भर होना पड़ सकता है। इससे निजी परिवहन सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की संभावना है।
कर्मचारी संगठनों ने संभावित असुविधा के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि समय रहते लंबित मांगों का समाधान किया जाए तो हड़ताल टाली जा सकती है।
मोर्चा ने सरकार से अपील की है कि वह 4 नवंबर तक संबंधित आदेश जारी करे और पहले बनी सहमति को लागू करने की दिशा में कदम उठाए।
फिलहाल हरियाणा में 5 और 6 नवंबर को प्रस्तावित रोडवेज हड़ताल को लेकर कर्मचारियों की तैयारियां जारी हैं। विभिन्न डिपो में गेट मीटिंग आयोजित करके कर्मचारियों को आंदोलन के लिए एकजुट किया जा रहा है।
अब सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत महत्वपूर्ण होगी। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है, तो हड़ताल टल सकती है। अन्यथा यात्रियों को दो दिनों तक बस सेवाओं में व्यवधान का सामना करना पड़ सकता है।