एक सितंबर से बढ़ेगा प्रॉपर्टी टैक्स और पानी का बिल कलेक्टर रेट के आधार पर लगेगा टैक्स
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी के लोगों की जेब पर एक सितंबर से अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है। सरकार की ओर से जारी नए नोटिफिकेशन के अनुसार अब प्रॉपर्टी टैक्स और सीवर-पानी बिल की दरों में बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोगों को पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा।
नई व्यवस्था में प्रॉपर्टी टैक्स को कलेक्टर रेट के आधार पर तय किया जाएगा। इसके अलावा पानी के बिल की दरों में भी लंबे समय बाद संशोधन किया गया है। बताया जा रहा है कि पानी की दरों में कुछ श्रेणियों में 200 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है।
कलेक्टर रेट के हिसाब से तय होगा प्रॉपर्टी टैक्स
नए नियमों के तहत अब प्रॉपर्टी टैक्स की गणना कलेक्टर रेट के आधार पर की जाएगी।
इसका मतलब यह है कि अगर दो अलग-अलग कॉलोनियों में कलेक्टर रेट अलग-अलग हैं, तो वहां बने समान आकार के मकानों पर भी टैक्स की राशि अलग हो सकती है।
जिस क्षेत्र में जमीन का कलेक्टर रेट अधिक होगा, वहां रहने वाले लोगों को ज्यादा प्रॉपर्टी टैक्स देना पड़ेगा।
अब तक कई जगहों पर टैक्स निर्धारण की प्रक्रिया अलग तरीके से होती थी, लेकिन नई व्यवस्था में क्षेत्र के कलेक्टर रेट को अधिक महत्व दिया जाएगा।
लोगों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
प्रॉपर्टी टैक्स और पानी के बिल में बढ़ोतरी से आम लोगों के मासिक खर्च पर असर पड़ने की संभावना है।
शहर के कई लोगों का कहना है कि पहले ही महंगाई के कारण घरेलू बजट प्रभावित है, ऐसे में टैक्स और बिलों में बढ़ोतरी से अतिरिक्त परेशानी होगी।
हालांकि, सरकार का तर्क है कि नई दरों से नगर निकायों की आय बढ़ेगी और शहर में सुविधाओं के विकास में मदद मिलेगी।
14 साल बाद बढ़ाए गए पानी के रेट
पानी की दरों में करीब 14 साल बाद संशोधन किया गया है। नई दरें भी एक सितंबर से लागू होंगी।
नए बदलाव के तहत पानी के बिल में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। कुछ श्रेणियों में यह बढ़ोतरी 200 प्रतिशत तक बताई जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से पानी की दरों में बदलाव नहीं किया गया था, जबकि रखरखाव और संचालन का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
सीवर और पानी व्यवस्था में सुधार का दावा
प्रशासन का कहना है कि बढ़ी हुई दरों से मिलने वाले राजस्व का उपयोग सीवर और जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने में किया जाएगा।
शहर में पाइपलाइन, सीवर व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं के रखरखाव के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत होती है।
नई दरों को लागू करने के पीछे यही कारण बताया जा रहा है।
कॉलोनियों के हिसाब से बदलेगा टैक्स
नई टैक्स व्यवस्था का सबसे बड़ा असर उन क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है, जहां कलेक्टर रेट काफी अधिक हैं।
एक ही आकार के मकान होने के बावजूद अलग-अलग कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को अलग-अलग टैक्स देना पड़ सकता है।
इससे टैक्स गणना में क्षेत्रीय अंतर और ज्यादा स्पष्ट हो जाएगा।
लोगों ने उठाए सवाल
नई व्यवस्था लागू होने से पहले ही शहर के कई लोगों ने इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
लोगों का कहना है कि टैक्स बढ़ाने से पहले नगर निकायों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें बेहतर सुविधाएं भी मिलें।
नागरिकों ने मांग की है कि नई दरों को लागू करने से पहले लोगों को पूरी जानकारी दी जाए।
प्रशासन ने शुरू की तैयारी
नई दरों को लागू करने के लिए संबंधित विभागों ने तैयारी शुरू कर दी है।
प्रॉपर्टी टैक्स और पानी के बिल की नई गणना के अनुसार ही सितंबर से लोगों को भुगतान करना होगा।
अधिकारियों की ओर से लोगों को नई व्यवस्था की जानकारी देने का काम भी किया जा रहा है।
एक सितंबर से लागू होंगे नए नियम
सरकार के नोटिफिकेशन के अनुसार, एक सितंबर से प्रॉपर्टी टैक्स और सीवर-पानी बिल की नई दरें लागू हो जाएंगी।
इसके बाद शहरवासियों को नए नियमों के अनुसार भुगतान करना होगा।
प्रशासन का कहना है कि नई व्यवस्था से शहर की सुविधाओं में सुधार होगा, जबकि लोगों को उम्मीद है कि बढ़े हुए भुगतान के बदले उन्हें बेहतर नागरिक सुविधाएं भी मिलेंगी।