Narnail: नारनौल में सफाई ठप, कचरा बना बड़ी समस्या

Update: 2026-05-03 14:52 GMT

नारनाैल: जिले में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल का असर अब सफाई व्यवस्था पर भी साफ नजर आने लगा है। कर्मचारियों की मांगों को लेकर कामकाज प्रभावित है, जिससे नगर व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।

जिला मुख्यालय नारनौल सहित महेंद्रगढ़, कनीना और अटेली कस्बों से रोजाना अनुमानित 35 से 45 टन कचरा निकलता है। आम दिनों में यह कचरा नियमित रूप से उठाया जाता है, लेकिन हड़ताल के चलते व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। हड़ताल के कारण करीब 200 टन तक कचरा अलग-अलग स्थानों पर जमा हो चुका है। बाजारों, गलियों और रिहायशी इलाकों में कूड़े के ढेर लग गए हैं, जिससे बदबू और गंदगी का माहौल बन गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे के ढेर के कारण न केवल आवागमन में दिक्कत हो रही है, बल्कि मच्छरों और आवारा पशुओं की संख्या भी बढ़ गई है। दुकानदारों को ग्राहकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, वहीं बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में गंदगी और कचरे के कारण बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है।

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ राजेश शर्मा के अनुसार, खुले में पड़े कचरे से मच्छर और बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं, जिससे डेंगू, मलेरिया, डायरिया और त्वचा संबंधी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही कचरा उठाने की व्यवस्था बहाल नहीं की गई, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमा हो चुके कचरे को जल्द से जल्द साफ कराना और बीमारी फैलने से रोकना है। फिलहाल वैकल्पिक इंतजाम सीमित हैं, कुछ अस्थाई कर्मचारी काम पर जुटे हैं, लेकिन समस्या गंभीर बनी हुई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो जिला में स्वच्छता और स्वास्थ्य दोनों बड़े संकट का रूप ले सकते हैं।

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