Chandigarh,चंडीगढ़: धारा 138 निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (एनआई) एक्ट के तहत अपराध का निष्कर्ष निकालने के लिए केवल चेक पर हस्ताक्षर करना पर्याप्त नहीं है। यह देखते हुए चंडीगढ़ के सिविल जज रिफी भट्टी ने मलोया निवासी बाल कृष्ण को बरी कर दिया है, क्योंकि शिकायतकर्ता आरोप साबित करने में विफल रहा। अदालत में दायर शिकायत में राजेश चौहान ने कहा कि आरोपी प्रॉपर्टी के कारोबार में लगा हुआ है। वह उसे तयशुदा प्रॉपर्टी देने में विफल रहा। उसके द्वारा भुगतान की गई राशि वापस करने के लिए आरोपी ने उसे चेक जारी किया। जब उसने चेक पेश किया तो 20 अक्टूबर, 2019 को यह “फंड अपर्याप्त” टिप्पणी के साथ बाउंस हो गया। शिकायतकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी के चेक पर हस्ताक्षर, इसलिए, एनआई एक्ट के तहत आरोपी के खिलाफ कानूनी अनुमान पैदा होता है, जिसका खंडन करने में आरोपी विफल रहा है। चेक उसके दायित्व के निर्वहन के लिए जारी किया गया था। दूसरी ओर, आरोपी के वकील पलविंदर सिंह 
Advocate Palwinder Singh 
ने तर्क दिया कि आरोपी न तो प्रॉपर्टी डीलर के तौर पर काम कर रहा है और न ही उसने कभी शिकायतकर्ता से कोई रकम ली है। शिकायतकर्ता ने आरोपी के खाली सिक्योरिटी चेक का दुरुपयोग किया, जो सिक्योरिटी के तौर पर दिए गए थे। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि चेक के खिलाफ आरोपी की कोई कानूनी जिम्मेदारी नहीं बनती।
उन्होंने तर्क दिया कि आरोपी शिकायतकर्ता को कोई भुगतान करने के लिए जिम्मेदार नहीं है
और आरोपी से पैसे हड़पने के लिए झूठे आधार पर झूठी शिकायत दर्ज कराई गई है। पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले में आरोपी को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने में विफल रहा कि चेक आरोपी ने कानूनी तौर पर लागू होने वाले कर्ज या देनदारी के भुगतान के लिए जारी किया था। कानूनी नोटिस में शिकायतकर्ता ने न तो आरोपी के साथ किसी बिक्री समझौते या संपत्ति की खरीद के लिए किसी समझौते की तारीख का जिक्र किया है और न ही आरोपी के जरिए उसके द्वारा खरीदी जाने वाली संपत्ति के विवरण का। अदालत ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि चेक पर हस्ताक्षर आरोपी के हैं, लेकिन चेक पर हस्ताक्षर मात्र से एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत अपराध का निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं है। इस प्रकार, एनआई अधिनियम की धारा 138 के तहत दंडनीय अपराध का आवश्यक तत्व यानी आरोपी द्वारा कानूनी रूप से वसूली योग्य ऋण/दायित्व के निर्वहन में चेक जारी करना अप्रमाणित रहा, जिसे शिकायतकर्ता को 'उचित संदेह से परे' के मानदंड पर साबित करना था। नतीजतन, वर्तमान शिकायत खारिज कर दी जाती है और आरोपी को उस पर दिए गए आरोप के नोटिस से बरी कर दिया जाता है।
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