गुरुग्राम। हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (हरेरा) गुरुग्राम ने फ्लैट की डिलीवरी में देरी के मामले में बिल्डर कंपनी विपुल लिमिटेड को बड़ा झटका दिया है। प्राधिकरण ने सेक्टर-81 स्थित विपुल लावण्या परियोजना में देरी से कब्जा मिलने के मामले में खरीदार को ब्याज देने का आदेश दिया है।

हरेरा गुरुग्राम ने बिल्डर की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कंपनी ने दावा किया था कि फ्लैट का कब्जा देने के समय हुए पूर्ण और अंतिम समझौते के बाद खरीदार किसी अतिरिक्त मुआवजे या दावे का हकदार नहीं है।

प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि कब्जा मिलने के बाद भी खरीदार को परियोजना में हुई देरी के लिए नियमानुसार राहत मिल सकती है।

यह आदेश हरेरा गुरुग्राम के चेयरमैन अरुण कुमार ने 17 जुलाई 2026 को शिकायत संख्या 3510/2025 में जारी किया।

2010 में बुक किया था फ्लैट

मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता राजेश खरबंदा और सुमन खरबंदा ने सितंबर 2010 में विपुल लावण्या परियोजना के टावर-3 में 1780 वर्ग फुट का फ्लैट बुक किया था।

खरीदारों ने परियोजना में निवेश करते समय तय समय सीमा के अनुसार फ्लैट मिलने की उम्मीद की थी। हालांकि, परियोजना में देरी के कारण उन्हें निर्धारित समय पर कब्जा नहीं मिल सका।

इसके बाद खरीदारों ने हरेरा गुरुग्राम में शिकायत दर्ज कराई और देरी की अवधि के लिए ब्याज की मांग की।

बिल्डर की दलील को नहीं माना

सुनवाई के दौरान विपुल लिमिटेड की ओर से दलील दी गई कि फ्लैट का कब्जा सौंपते समय खरीदार और बिल्डर के बीच पूर्ण एवं अंतिम समझौता हो चुका था।

बिल्डर का कहना था कि अंतिम समझौते के बाद खरीदार किसी अतिरिक्त दावे की मांग नहीं कर सकते।

हालांकि, हरेरा ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। प्राधिकरण ने कहा कि रियल एस्टेट कानून के तहत खरीदार को परियोजना में हुई देरी के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार राहत पाने का अधिकार है।

देरी पर खरीदारों के अधिकार सुरक्षित

हरेरा ने अपने आदेश में कहा कि कब्जा मिलने के बाद भी यदि बिल्डर ने तय समय सीमा का पालन नहीं किया है तो खरीदार देरी की अवधि के लिए ब्याज का दावा कर सकता है।

प्राधिकरण ने यह भी माना कि अंतिम समझौता खरीदार के वैधानिक अधिकारों को खत्म नहीं करता।

रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट यानी RERA के तहत बिल्डर की जिम्मेदारी होती है कि वह परियोजना को तय समय में पूरा करे और देरी होने पर खरीदारों को निर्धारित राहत दे।

RERA कानून का हवाला

रियल एस्टेट क्षेत्र में खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए RERA कानून लागू किया गया है। इसके तहत बिल्डर को परियोजना की प्रगति, समय सीमा और अन्य जरूरी जानकारियां पारदर्शी तरीके से उपलब्ध करानी होती हैं।

यदि किसी कारण से परियोजना में देरी होती है तो खरीदारों को मुआवजा या ब्याज का प्रावधान दिया गया है।

हरेरा गुरुग्राम के इस फैसले को इसी कानूनी व्यवस्था के तहत देखा जा रहा है।

खरीदारों को मिली राहत

इस मामले में हरेरा के आदेश से शिकायतकर्ता खरीदारों को राहत मिली है। प्राधिकरण ने बिल्डर को देरी की अवधि के लिए ब्याज देने का निर्देश दिया है।

इस फैसले से उन अन्य खरीदारों को भी उम्मीद मिली है, जो लंबे समय से फ्लैट की डिलीवरी में देरी या बिल्डर विवादों का सामना कर रहे हैं।

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए संदेश

हरेरा के इस आदेश को रियल एस्टेट सेक्टर में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह फैसला बिल्डरों के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा सकता है कि परियोजनाओं को समय पर पूरा करना जरूरी है।

वहीं, खरीदारों के लिए यह आदेश यह स्पष्ट करता है कि कब्जा मिलने के बाद भी देरी से जुड़े अधिकार समाप्त नहीं होते।

रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे फैसलों से खरीदारों का भरोसा मजबूत हो सकता है और बिल्डरों की जवाबदेही बढ़ सकती है।

आगे की प्रक्रिया

अब विपुल लिमिटेड को हरेरा के आदेश के अनुसार खरीदार को ब्याज का भुगतान करना होगा। हालांकि, आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्पों को लेकर बिल्डर आगे क्या कदम उठाता है, यह देखना बाकी है।

फिलहाल हरेरा गुरुग्राम के इस फैसले ने फ्लैट डिलीवरी में देरी से जुड़े मामलों में खरीदारों के अधिकारों को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है।

यह मामला उन हजारों घर खरीदारों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो बिल्डर द्वारा तय समय पर परियोजना पूरी नहीं करने की समस्या का सामना करते हैं।

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