मिड डे मील में बड़ा बदलाव अब तौलकर इस्तेमाल होगी हर सामग्री
स्कूलों के मिड डे मील पर नई निगरानी रोज देना होगा रिकॉर्ड
नई दिल्ली: सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील यानी प्रधानमंत्री पोषण योजना को लेकर निगरानी व्यवस्था को और सख्त किया जा रहा है। भोजन की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अब खाद्य सामग्री का इस्तेमाल तौलकर किया जाएगा और रोजाना उसका पूरा हिसाब दर्ज करना होगा। शिक्षा विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए हैं।
नई व्यवस्था का उद्देश्य मिड-डे मील में किसी भी तरह की गड़बड़ी, खाद्यान्न की बर्बादी और अनियमितता को रोकना है। स्कूलों में चावल, दाल, सब्जी, तेल, मसाले समेत अन्य सामग्री को तय मात्रा के अनुसार उपयोग करने की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद रोजाना उपयोग हुई सामग्री और बचे हुए स्टॉक का रिकॉर्ड तैयार करना होगा।
सामग्री की मात्रा का रखा जाएगा रिकॉर्ड
नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में भोजन बनाने से पहले जरूरी सामग्री को तौलकर दर्ज किया जाएगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कितने बच्चों के लिए कितना भोजन तैयार किया गया और कितनी सामग्री खर्च हुई। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया से मिड-डे मील योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और बच्चों को निर्धारित मात्रा एवं गुणवत्ता के अनुसार भोजन मिल सकेगा।
रोजाना देना होगा हिसाब
अब स्कूलों को मिड-डे मील से जुड़े रिकॉर्ड नियमित रूप से अपडेट करने होंगे। इसमें खाद्यान्न की उपलब्धता, उपयोग की गई सामग्री, तैयार भोजन और बच्चों की संख्या जैसी जानकारियां दर्ज करनी होंगी। शिक्षा विभाग का उद्देश्य है कि योजना के संचालन में जवाबदेही तय हो और किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।
भोजन की गुणवत्ता पर भी नजर
मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता, रसोई की साफ-सफाई और खाद्य सामग्री के रखरखाव की निगरानी भी बढ़ाई जा रही है। हाल के वर्षों में मिड-डे मील को लेकर सामने आए कुछ मामलों के बाद सरकार ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया है। कई जगहों पर भोजन की गुणवत्ता में कमी और लापरवाही के मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्ती बढ़ाई है।
स्कूल प्रबंधन की बढ़ेगी जिम्मेदारी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रधानाध्यापक, शिक्षक और मिड-डे मील से जुड़े कर्मचारियों की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि भोजन तय मानकों के अनुसार तैयार हो और रिकॉर्ड सही तरीके से दर्ज किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी इस योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पारदर्शिता बढ़ाने की पहल
मिड-डे मील योजना देश के सबसे बड़े स्कूल पोषण कार्यक्रमों में शामिल है। इसका उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना भी है। नई निगरानी व्यवस्था से उम्मीद है कि योजना के संचालन में सुधार आएगा और बच्चों को बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन मिल सकेगा।